
CG Mirror News
जशपुर। जिले के केरसई में महिला की मौत के बाद सोमवार को ग्रामीणों और परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने से करीब एक महीने तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराने के बाद प्रफुल्ला हंसरा की कटक में इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद परिजन शव लेकर केरसई के शासकीय अस्पताल PHC पहुंचे और अस्पताल परिसर में शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया । ग्रामीणों का आरोप है कि, डिलीवरी के बाद महिला की हालत बिगड़ती गई, लेकिन समय पर उचित इलाज और उपचार व्यवस्था नहीं मिलने के कारण स्थिति गंभीर होती चली गई। ग्रामीण अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग एवं क्षतिपूर्ति मुआवजा को लेकर घंटों तक अस्पताल परिसर में डटे हैँ ।
जानकारी के अनुसार 29 जुलाई को केरसई के शासकीय अस्पताल में प्रफुल्ला हंसरा की डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उन्हें इलाज के लिए पहले कुनकुरी ले जाया गया। इसके बाद रायगढ़ मेडिकल कॉलेज, सुंदरगढ़,बुरला और अंत में कटक के अस्पताल में भर्ती कराया गया । करीब एक महीने तक अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चलने के बावजूद रविवार सुबह करीब 8 बजे कटक में महिला ने दम तोड़ दिया।
महिला की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने केरसई अस्पताल पहुंचकर शव को अस्पताल परिसर में रख दिया। ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकीय स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते महिला को बेहतर उपचार और उचित चिकित्सकीय सुविधा मिलती तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में डिलीवरी के दौरान लगाए गए कॉपर-टी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि डिलीवरी के बाद की गई चिकित्सकीय प्रक्रिया और महिला की लगातार बिगड़ती तबीयत के बीच कोई संबंध था या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए । हालांकि अभी तक कॉपर-टी को महिला की मौत का कारण होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञों की राय और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी ।
केरसई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की डॉक्टर लक्ष्मी पैकरा ने उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बताया कि महिला की मौत दिमाग की नस में ब्लड का थक्का जमने के कारण होना बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर परिजन निर्दोष हंसडा का कहना है कि डिलीवरी के बाद महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई और उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद में एक के बाद एक चार अस्पतालों में ले जाना पड़ा, लेकिन अंततः उनकी मौत हो गई।
महिला की मौत को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए निष्पक्ष जांच टीम गठित की जाए और जरूरत पड़ने पर दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके। साथ ही डिलीवरी के समय मौजूद डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। ग्रामीणों ने मृतका के परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई है।
विरोध की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। तपकरा तहसीलदार सुश्री संगीता साय ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत की। ओमकारेश्वर सिंह एसडीएम फरसाबहार, थाना प्रभारी संदीप कौशिक, भुनेश्वर भगत सहित उपरकछार चौकी और तपकरा पुलिस का स्टाफ भी मौके पर मौजूद रहे अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाइश दी और पूरे मामले की जांच का भरोसा दिलाया।
फिलहाल महिला की मौत के बाद उठे सवालों ने केरसई अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर डिलीवरी के बाद महिला की हालत अचानक क्यों बिगड़ी, उसे समय पर किस तरह का उपचार दिया गया, चार अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के बावजूद उसकी स्थिति क्यों नहीं संभल सकी और कॉपर-टी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है, इन सभी सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट और मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। दूसरी ओर ग्रामीणों का विरोध और कार्रवाई की मांग लगातार जारी है।
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