
CG Mirror News
जशपुर :- जिले के कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी कॉलेज भवन के निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह विधानसभा क्षेत्र में चरईडांड मेडिकल कॉलेज परिसर के पास करंजटोली स्कूल के समीप चल रहे निर्माण कार्य में अमानक सामग्री के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। निर्माण स्थल पर घटिया सामग्री का उपयोग, सरियों की दूरी में अनियमितता और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेत में मिट्टी, ढलाई में जीरा चिप्स और स्टोन डस्ट का आरोप
निर्माण स्थल पर उपयोग की जा रही रेत में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक मिट्टी मिली होने का दावा किया गया है। वहीं बेस लेंथ की ढलाई में गिट्टी, चिप्स के साथ जीरा चिप्स गिट्टी और पत्थर के डस्ट के इस्तेमाल का आरोप है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि क्या निर्माण कार्य स्वीकृत तकनीकी मापदंडों और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार किया जा रहा है?
रेत में मिट्टी की वास्तविक मात्रा और ढलाई में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच और प्रयोगशाला परीक्षण जरूरी है। लेकिन मौके पर सामने आए आरोपों ने जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
ड्राइंग के विपरीत सरिया बांधने का आरोप
निर्माण कार्य में स्ट्रक्चर की मजबूती को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। दावा है कि बेस लेवल पर ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार सरियों के बीच की दूरी करीब 4.5 इंच होनी चाहिए, जबकि मौके पर 7 से 8 इंच की दूरी पर सरिया बांधा जा रहा है। इसके अलावा जंग लगे सरियों के इस्तेमाल का आरोप भी सामने आया है।
यदि तकनीकी जांच में यह पाया जाता है कि निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन और गुणवत्ता मानकों के विपरीत किया जा रहा है, तो यह भवन की मजबूती और भविष्य में इसका उपयोग करने वाले विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
बिना सूचना बोर्ड निर्माण, ठेकेदार और लागत की जानकारी पर सवाल
मीडिया टीम की पड़ताल के दौरान निर्माण स्थल पर स्पष्ट सूचना बोर्ड नहीं मिलने का दावा किया गया है। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों की लागत से बन रहे इस कॉलेज भवन का निर्माण किस विभाग के अंतर्गत हो रहा है? इसकी स्वीकृत लागत कितनी है? ठेका किस एजेंसी को दिया गया है और निर्माण पूरा करने की समय-सीमा क्या है?
मौके पर मौजूद विजय इंफ्रा के साइट इंजीनियर बिकु कुमार राणा से निर्माण की लागत और अन्य जानकारी को लेकर सवाल किए गए। लेकिन संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने से निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
सरकारी इंजीनियर को फोन, नहीं मिला जवाब
निर्माण कार्य में सामने आए आरोपों को लेकर मीडिया टीम ने संबंधित सरकारी इंजीनियर से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया। लेकिन कॉल करने के बावजूद अधिकारी का फोन नहीं उठा। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य में सामने आए गंभीर आरोपों पर जिम्मेदार विभाग जवाब देने से क्यों बच रहा है?
क्या निर्माण कार्य की नियमित तकनीकी जांच हो रही है? क्या रेत, गिट्टी, सीमेंट और सरियों की गुणवत्ता की जांच की गई है? क्या मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने इन सभी बिंदुओं का परीक्षण किया? और यदि जांच हुई है, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।
सुशासन के दावों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र में हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले भवन में यदि अमानक सामग्री का इस्तेमाल या तकनीकी मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो यह सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण की गुणवत्ता दोनों से जुड़ा गंभीर विषय होगा।
मामले में स्वतंत्र तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री के नमूनों की प्रयोगशाला जांच, स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन का सत्यापन और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और निर्माण कार्य में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।
अब सवाल सिर्फ एक कॉलेज भवन का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी और जवाबदेही का है। क्या संबंधित विभाग आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी? या फिर निर्माण कार्य इसी तरह सवालों के बीच आगे बढ़ता रहेगा? जवाब का इंतजार है।
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