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जशपुर में आज भी सैकड़ो साल पुराना चमत्कारिक नगाड़ा मौजूद है।सैकड़ो साल पहले डोम राजाओं के जमाने के इस नगाड़े के बारे में बताया जाता है की पुराने समय मे नदी में बाढ़ या किसी अनिष्ट की आशंका पर यह नगाड़ा खुद ही बज उठता था और सुनसान रखे इस नगाड़े को जिसने चुराया तो उसकी मौत हो गई और उसके परिवार का विनाश हो गया।देखिए ये स्पेशल रिपोर्ट।

हिंदुस्तान में कभी दो स्टेट में डोम राजाओं का अस्तित्व हुआ करता था ।जिनमें एक काशी स्टेट और दूसरा जशपुर स्टेट था ।काशी स्टेट में तो आज भी कहा जाता है कि काशी के दो राजा हैं एक काशी नरेश और एक डोम । डोम राजा का अस्तित्व आज भी है और गंगा तट के किनारे स्थित राजा हरिश्चंद्र घाट में आज भी डोम राजा के वंशज सिंहासन पर बैठते हैं और अंतिम संस्कार के पूर्व शव दहन की अग्नि आज भी डोम राजा के वंशज ही देते हैं और बदले में लेते हैं टैक्स। इसके कारण न केवल काशी में बल्कि देश विदेश से आने वाले सनातन हिंदू धर्मावलंबियों में डोम राजा का सम्मान बना हुआ है ।वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ प्रदेश के जशपुर स्टेट में आज से लगभग 300 वर्ष पूर्व डोम राजाओं का राज हुआ करता था ।
जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखण्ड के रानीकोम्बो में ईब नदी के किनारे दो नगाड़े रखे हैं जिन्हें जोड़ा नगाड़ा और विजय डंका भी कहते हैं।बताया जाता है की डोम राजाओं के जमाने में युद्ध मे जीत के बाद इस डंके को बजाया जाता था इसी वजह से इसे विजय डंका कहते हैं।यह नगाड़ा कोई सामान्य नगाड़ा नही डोम समाज के लोगों एवं स्थानीय लोगों की मानें तो यह एक चमत्कारीक नगाड़ा है।पुराने समय मे जब डोम राजाओं और साम्राज्य के ऊपर कोई विपत्ति आने वाली हो या फिर जिस जगह पर यह नगाड़ा रखा था उसके किनारे बहने वाली ईब नदी में बाढ़ आने वाली हो तो ये नगाड़ा खुद ही बज उठता था जिसकी वजह से सभी लोग सचेत हो जाया करते थे।
सालों तक यह नगाड़ा खुले में खजूर पेड़ के नीचे पड़ा रहा।2011 में भाजपा नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव ने इस नगाड़े को सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए रंगमंच निर्माण के लिए डोम समाज को फंड दिया था जिसके बाद उस फंड से मंदिरनुमा छत बनाया गया और जब इस नगाड़े को उस स्थान पर 2014 में ले जाया जा रहा था तो नगाड़ा अपनी जगह से हिला ही नहीं। फिर डोम समाज के वरिष्ठजनों एवं लोगों ने कुछ दिनों पूजापाठ की जिसके बाद यह नगाड़ा उठा और 2014 से यह नगाड़ा छतके नीचे सुरक्षित रखा है। समाज के लोगों ने बताया की कुछ लोगों ने इस नगाड़े को चोरी भी कर लिया था लेकिन यह नगाड़ा खुद वापिस इसी स्थान पर पहुंच जाता है और जिस भी व्यक्ति ने इस नगाड़े को चोरी की या तो उसकी मौत हो गई या तो उसके परिवार का विनाश हो गया।डोम समाज के साथ अन्य समाज के लोग भी इस स्थान पर आकर पुजा-पाठ करते हैं और इस स्थान पर जो भी मन्नत मांगी जाती है वो पूरी होती है।
सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि सैकड़ो साल तक खुले आसमान के नीचे रहने के बावजूद इस विजय डंका के अवशेष आज भी सुरक्षित हैं जो स्वयं ही दर्शाता है की यह कोई आम नगाड़ा नहीं बल्कि चमत्कारिक विजय डंका है।
सुनिए क्या कहते है समाज के लोग 👇डोम समाज के प्रतिनिधियों ने बताया की यह नगाड़ा लगभग 300 साल पूर्व के है बताया जाता है की ज़ब डोम राजाओं की युद्ध होती थी तो इस डंका के बजने से वह सभी युद्ध को विजय पाते थे इसी को लेकर समाज के लोग खास फरवरी माह में विजय दिवस के रूप में प्रतिवर्ष जोड़ा नगाड़ा का पूजा करते है वही तीन प्रान्त से समाज के लोग इस महोत्सव में शामिल होते है।
क्या कहते हैं स्थानीय निवासी 👇जोड़ा नगाड़ा डोम समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवशेष है जो आज भी महोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष समाज के लोगों द्वारा पूजा जाता है. बताया जाता है की यह जोड़ा नागाड़ा 3 सौ साल पुराना है और इसे डोम राजा युद्ध से पहले और युद्ध के बाद बजाते थे उनका सम्राज्य मिटने के बाद इसे चोरी करने की बहुत कोशिश की गई पर चोर के वंश का विनाश हो गया आज भी मान्यता है की जब भी नदी में बाड आने के स्थिति में यह जोड़ा नागाड़ा खुद ब खुद बजता है..
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