
CG Mirror News :
जशपुर जिले के जनपद पंचायत बगीचा अंतर्गत ग्राम पंचायत नन्हेसर में मनरेगा (VB-G-RAM G) योजना के तहत फर्जी जॉब कार्ड और फर्जी मस्टर रोल बनाकर शासकीय मजदूरी राशि डकारने का बड़ा सिंडिकेट उजागर हुआ है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब नन्हेसर निवासी दीपक कुमार गुप्ता पिता महादेव प्रसाद गुप्ता ने 28 फरवरी 2026 को जनपद व ग्राम पंचायत में लिखित शिकायत दर्ज कराई कि उनके वैध जॉब कार्ड क्रमांक CH-07-009-068-002/272 में मिलीभगत करके प्रिया गुप्ता नामक किसी अनाधिकृत अज्ञात महिला का नाम जोड़ दिया गया है। हितग्राही को पूरी तरह अंधेरे में रखकर 28 फरवरी 2026 तक की स्थिति में कुल 69 कार्य दिवसों का फर्जी काम मस्टर रोल में दर्शा दिया गया और योजना के तहत मिलने वाली मजदूरी राशि का गबन कर लिया गया।
इस खेल की परतें तब और खुलीं जब पूर्व में जनपद पंचायत बगीचा द्वारा 25 फरवरी 2026 को पत्र क्रमांक 592 जारी कर पंचायत के सभी 1 से 325 जॉब कार्डों के सघन परीक्षण के निर्देश दिए गए थे। इसके जवाब में ग्राम पंचायत नन्हेसर के सरपंच व सचिव द्वारा 18 मार्च 2026 को पत्र क्रमांक 59 के माध्यम से जनपद कार्यालय को आधिकारिक प्रतिवेदन भेजा गया। पंचायत ने अपने पत्र में स्पष्ट तौर पर यह स्वीकार किया था कि गांव में कुल 325 जॉब कार्ड पंजीकृत हैं, जिनमें से अधिकांश कार्ड वर्ष 2006 से बने हुए हैं और वर्षों से निष्क्रिय पड़े हैं। इन्हीं निष्क्रिय व फर्जी जॉब कार्डों का इस्तेमाल कर जिम्मेदार कर्मियों द्वारा मनरेगा के तहत फर्जी मस्टर रोल तैयार कर सरकारी खजाने में लगातार सेंध लगाई जा रही थी। ग्राम पंचायत द्वारा फर्जी व निष्क्रिय सदस्यों के नाम हटाने हेतु बाकायदा प्रस्ताव व सूची तैयार कर जनपद पंचायत को अग्रिम कार्रवाई हेतु सौंपी गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब यह पूरा प्रकरण कलेक्टर टीएल की समीक्षा बैठक में पहुंचा तो प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। इसके बाद जनपद पंचायत बगीचा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पत्र क्रमांक 137 के तहत 28 जुलाई 2026 को विधिवत जांच आदेश जारी किया गया। आदेश में स्पष्ट बिंदु तय किए गए थे कि VB-G-RAM G योजना के तहत फर्जी जॉब कार्ड किसके प्रमाणीकरण से जारी किए गए, इन्हें कंप्यूटर में किस ऑपरेटर की आईडी से जनरेट किया गया, फर्जी मस्टर रोल किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा जारी किए गए, मजदूरी का अवैध भुगतान किन खातों में हुआ तथा फर्जी जॉब कार्डधारी व सदस्यों के वास्तविक निवास का भौतिक सत्यापन किया जाए।
इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जनपद पंचायत ने पांच अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की थी, जिसमें विकास विस्तार अधिकारी रमेश सोरी, करारोपण अधिकारी बीरबल लकड़ा, करारोपण अधिकारी प्रताप मिंज, सहायक प्रोग्रामर अजय कुमार कुजूर तथा तकनीकी सहायक मनमोहन भगत को शामिल किया गया था। साथ ही तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक (वैकल्पिक व्यवस्था) अभय कुमार गुप्ता को भी जांच समिति के समक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 28 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश में कड़े शब्दों में ताकीद की गई थी कि पूरी जांच कर बयान मय प्रतिवेदन महज सात दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए।
हैरानी और अफसोस की बात यह है कि 28 जुलाई 2026 को महज सात दिन में रिपोर्ट सौंपने के फरमान को जारी हुए महीनों का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन जांच टीम की रिपोर्ट आज तक जनपद दफ्तर के बस्ते में धूल फांक रही है। आज तक न तो जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किया गया, न ही गरीबों के हक पर डाका डालने वाले तत्कालीन रोजगार सहायक या किसी अन्य संलिप्त अधिकारी-कर्मचारी पर कोई कानूनी शिकंजा कसा गया है। इतना ही नहीं, सरकारी खजाने से गबन की गई शासकीय मजदूरी राशि की वसूली भी अब तक शुरू नहीं की जा सकी है।
कलेक्टर टीएल के निर्देश और जनपद के लिखित आदेश के बावजूद महीनों तक जांच का ठंडे बस्ते में पड़े रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों व शिकायतकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर सात दिन की जांच को महीनों दबाकर किस रसूखदार को बचाने का खेल खेला जा रहा है। क्या गरीबों और मजदूरों के पसीने की कमाई लूटने वाले सिंडिकेट को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्षेत्र के मजदूरों और ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन व कलेक्टर से मांग की है कि मामले की फाइल दबाने वाले जांच दल पर भी सवाल खड़े किए जाएं, मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए और गबन की गई पूरी राशि की सख्त रिकवरी की जाए।
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