कलेक्टर के आदेश को ठेंगा! शिक्षा विभाग में अनुशासनहीनता का आरोप, निलंबित शिक्षक को भत्ता जारी करने पर उठे सवाल
कुनकुरी में शिक्षा विभाग का गजब खेल! निर्धारित मुख्यालय में उपस्थिति नहीं, फिर भी जारी होता रहा जीवन निर्वाह भत्ता; शिक्षक के साथ वेतन आहरण अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में
जशपुर जिले के शिक्षा विभाग में कथित अनुशासनहीनता और नियमों के पालन को लेकर एक मामला सामने आया है। आरोप है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक नारायणपुर में पदस्थ शिक्षक एलबी भरत कुमार यादव ने कलेक्टर जशपुर के 9 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश के बाद निर्धारित मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मनोरा में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। इसके बावजूद संबंधित वेतन आहरण अधिकारी द्वारा लगातार जीवन निर्वाह भत्ता जारी किए जाने का आरोप है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिक्षक भरत कुमार यादव को 9 जुलाई 2026 को निलंबित किया गया था। आदेश में निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मनोरा निर्धारित किया गया था। बताया गया है कि प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक नारायणपुर ने 22 जुलाई 2026 को उन्हें मनोरा के लिए कार्यमुक्त कर दिया था।
इसके बावजूद निर्धारित मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं कराने का आरोप सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित कर्मचारी की मुख्यालय में उपस्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, तो जीवन निर्वाह भत्ते का भुगतान किस आधार पर जारी रखा गया?
एक तरफ आदेश के पालन पर सवाल, दूसरी तरफ भुगतान प्रक्रिया पर उठी उंगली
इस प्रकरण में निलंबित शिक्षक की ओर से आदेश के पालन और वेतन आहरण अधिकारी की ओर से भुगतान प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। हालांकि, संबंधित दस्तावेजों और विभागीय नियमों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या संबंधित कर्मचारियों से जवाब मांगा जाएगा? क्या उपस्थिति पंजी, कार्यमुक्ति आदेश और भत्ता भुगतान के अभिलेखों की जांच होगी? यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठ सकती है।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
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