
CG Mirror News
जशपुर । छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा पेश किए गए 1.72 लाख करोड़ के बजट पर जशपुर के कद्दावर कांग्रेस नेता और जिलाध्यक्ष यू.डी. मिंज ने तीखा हमला बोला है। मिंज ने इस बजट को ‘शब्दों का मायाजाल’ और ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ करार देते हुए कहा कि यह प्रदेश की उन्नति का नहीं, बल्कि युवाओं और आदिवासियों की ‘दुर्गति’ का बजट है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार ने जशपुर की अनदेखी कर यहाँ के पर्यटन और विकास के सपनों को गहरा आघात पहुँचाया है।
जशपुर के साथ ‘सौतेला’ व्यवहार: पर्यटन और स्वास्थ्य के नाम पर छलावा
बजट के विश्लेषण पर तंज कसते हुए यू.डी. मिंज ने कहा कि जशपुर और सरगुजा अंचल को पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मैनपाट के विकास के लिए खजाना खोला जा सकता है, तो जशपुर के प्राकृतिक वैभव को लावारिस क्यों छोड़ दिया गया?
मिंज ने कहा, “जशपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने का जो हमारा सपना था, उसे इस बजट ने कुचल दिया है। रही बात कुनकुरी मेडिकल कॉलेज की, तो यह केवल एक ‘चुनावी झुनझुना’ है। पिछले तीन बजट से घोषणाएं तो हो रही हैं, लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।”
युवाओं को मिला सिर्फ ‘झुनझुना’, रोजगार पर सन्नाटा
बजट में युवाओं के लिए किए गए बड़े-बड़े दावों की हवा निकालते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार के पास रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। शिक्षित बेरोजगारों को नौकरी देने के बजाय सरकार केवल निवेश के हवाई सपने दिखा रही है। उनके अनुसार, यह बजट ‘गति’ का नहीं बल्कि युवाओं की ‘दुर्गति’ का दस्तावेज है, जहाँ अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलित कर्मचारियों के लिए भी बजट की तिजोरी पूरी तरह बंद है।
तुलना: 2024 का ‘अमृत’ और 2026 का ‘जहर’?
सरकार जहाँ 2024-25 के ‘अमृतकाल’ बजट से तुलना कर 2026-27 के ‘संकल्प’ बजट को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं मिंज ने इसे भ्रष्टाचार की नई जमीन बताया। हालांकि बजट का आकार 1.47 लाख करोड़ से बढ़कर 1.72 लाख करोड़ हो गया है, लेकिन मिंज का दावा है कि इस वृद्धि का लाभ सरगुजा के आदिवासियों को नहीं मिलने वाला। सरगुजा विकास प्राधिकरण का बजट न बढ़ाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर नहीं है। साइबर थानों और सुरक्षा के नाम पर केवल प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, न कि जनहित की। यू.डी. मिंज के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस बजट को लेकर जनता के बीच जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता अब शब्दों के मायाजाल में नहीं फंसेगी। “संकल्प” और “अमृतकाल” जैसे भारी-भरकम शब्दों के पीछे छिपी विफलता अब उजागर हो चुकी है। जशपुर-सरगुजा की जनता अब आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस परिणाम और अपना हक मांगेगी।
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