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स्थानीय भाषा पर दें सरकारी योजनाओं की जानकारी विधायक भूषण बाड़ा ने विस सत्र में उठाई सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं फॉर्म स्थानीय भाषा में भी जारी करने की मांग

स्थानीय भाषा पर दें सरकारी योजनाओं की जानकारी विधायक भूषण बाड़ा ने विस सत्र में उठाई सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं फॉर्म स्थानीय भाषा में भी जारी करने की मांग

Cg Mirror News

रांची : विधायक भूषण बाड़ा ने झारखंड विधानसभा के सत्र में सरकारी योजनाओं की जानकारी एवं फॉर्म स्थानीय भाषा में भी जारी करने की जोरदार तरीके से आवाज उठाई गई। विधायक भूषण बाड़ा ने प्रश्न संख्या 129 के माध्यम से सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि क्या यह सही है कि सिमडेगा जिला भाषाई पिछड़ेपन का शिकार होने के कारण सरकारी फॉर्म, आदेश, नोटिफिकेशन और योजनाओं की भाषा समझ नहीं पाता। जिसके चलते ग्रामीण और आदिम-आदिवासी समुदाय सरकारी लाभ से वंचित हो जाते हैं। विधायक ने कहा कि जिले में सादरी, मुंडारी, उरांव और खड़िया जैसी स्थानीय भाषाएं प्रमुख हैं। जबकि सरकारी पत्राचार प्रायः हिंदी और अंग्रेजी में होता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग सरकारी दस्तावेज़ों का मतलब ही नहीं समझ पाते। इसका सीधा फायदा बिचौलिये उठाते हैं, जो सीधी-सादी जनता को भ्रमित कर उनके अधिकार तक छीन लेते हैं। उन्होंने विधानसभा में यह भी प्रश्न उठाया कि स्थानीय ग्रामीण भाषा न समझ पाने के कारण लाभार्थियों को अपनी योजना, पेंशन, राशन और अन्य सरकारी अधिकारों की प्रक्रिया समझ नहीं आती और वे वर्षों तक सिर्फ चक्कर लगाते रह जाते हैं। विधायक ने कहा कि खंड-1 में वर्णित जनता का बड़ा वर्ग सरकारी भाषा न समझ पाने की वजह से शोषण का शिकार बनता है और असली लाभार्थी होने के बावजूद सेवा से वंचित रह जाता है। विधायक ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यदि यह समस्या स्वीकार्य है, तो क्या राज्य सरकार सभी योजनाओं और सरकारी, गैर-सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी सादरी, मुंडारी, उरांव, खड़िया जैसी स्थानीय भाषाओं में देने हेतु स्थाई तंत्र स्थापित करने जा रही है? यदि हाँ, तो कब तक; नहीं तो क्यों। इस पर सरकार ने इस मामले में विचार करने की बात कही। इधर विधायक ने कहा कि सिमडेगा एक आदिवासी बहुल जिला है जहाँ अधिकांश लोग हिंदी पढ़ने-लिखने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा में सूचना उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। इससे न केवल योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीणों के लिए सरकारी दफ्तरों का भय भी कम होगा।

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