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जशपुर :- करीब दो दशक पहले जिले में सुर्खियों में आए बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला मामले में आखिरकार राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB), रायपुर ने विशेष न्यायालय जशपुर के समक्ष अंतिम प्रतिवेदन यानी चालान पेश कर दिया है। अंतिम प्रतिवेदन क्रमांक 67/2026 दिनांक 6 अगस्त 2026 दर्ज है। मामले में सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध विवेचना के बाद चालान पेश किया गया है, जबकि आरोपी रहे शिव शंकर वैष्णव की वर्ष 2009 में मृत्यु हो चुकी है। 2005 में दर्ज हुआ था मामला कुनकुरी स्थित शासकीय खाद्यान्न गोदाम में चावल के स्टॉक में कथित अनियमितता और कमी को लेकर EOW में FIR क्रमांक 01/2005, दिनांक 30 सितंबर 2005 दर्ज की गई थी। मामले में IPC की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत अपराध का उल्लेख किया गया है।
विवेचना के दौरान कुनकुरी गोदाम के दस्तावेज, रजिस्टर और पंजीयों की जांच की गई। प्राथमिक जांच में विभागीय गणना के दौरान 26,626.42 क्विंटल चावल की कमी सामने आई थी। बाद में संयुक्त जांच समिति द्वारा दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के आधार पर अंतिम विवेचना में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी का उल्लेख किया गया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति होने की बात जांच में सामने आई।
आवक-जावक से लेकर वितरण रिकॉर्ड तक जांच: जांच में 1 अप्रैल 2004 से 10 सितंबर 2005 के बीच कुनकुरी प्रदाय केंद्र एवं गोदाम में चावल की आवक-जावक से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले गए। दस्तावेजों के अनुसार इस अवधि में लंबी दूरी परिवहन (LRT) और कस्टम मिलिंग राइस (CMR) के माध्यम से करीब 2,07,411.04 क्विंटल चावल जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला। इसके अलावा BPL, APL, अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मध्यान्ह भोजन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम और सूखा राहत योजना समेत विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हुए वितरण की भी जांच की गई।
तीन आरोपियों की भूमिका का उल्लेख: अंतिम विवेचना में सुनील कुमार निगम, शिव शंकर वैष्णव और विमल कुमार गर्ग की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार वास्तविक स्थिति से अलग दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित कर उनका उपयोग किए जाने की बात सामने आई। सुनील कुमार निगम और शिव शंकर वैष्णव को गोदाम के खाद्यान्न स्टॉक पर पद के अनुसार नियंत्रण एवं महत्वपूर्ण भूमिका में बताया गया है। वहीं विमल कुमार गर्ग की भूमिका के संबंध में 18 डिलीवरी ऑर्डरों से जुड़े 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन एवं कथित वितरण का उल्लेख है।
2006 में हुई थी दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी: मामले में सुनील कुमार निगम को 29 अगस्त 2006 और विमल कुमार गर्ग को 10 अक्टूबर 2006 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों आरोपी न्यायालय के आदेश के अनुसार जमानत पर रहे हैं। करीब 20 साल बाद विवेचना पूरी होने के बाद अब मामला दोबारा न्यायालय के समक्ष पहुंचा है
मामले में आरोपी रहे शिव शंकर वैष्णव की 1 सितंबर 2009 को मृत्यु हो चुकी है। अंतिम प्रतिवेदन में उनकी मृत्यु का उल्लेख करते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र सहित आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है।
40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाह: आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जय नारायण प्रसाद ने बताया कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी वर्ष 2006 में हुई थी और वे न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर हैं। अधिवक्ता के अनुसार करीब 20 साल बाद लगभग 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ चालान न्यायालय में पेश किया गया है।
करीब दो दशक तक चली विवेचना के बाद चालान पेश होने से कुनकुरी का बहुचर्चित चावल घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब प्रकरण में आगे की कार्रवाई विशेष न्यायालय जशपुर में न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत होगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की बयानों के आधार पर किया जाएगा।
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