
अनोखा रिवाज : छत्तीसगढ़ के एक गांव जहाँ रक्षाबंधन की खास परंपरा, पहले बांधते हैं शहीद भाई को राखी।
जशपुर। बेटे को खोने का दर्द किसी मां से बेहतर कोई नहीं समझ सकता, लेकिन जशपुर जिले के पेरवाआरा गांव की सफियामा टोप्पो ने अपने इकलौते बेटे की शहादत को केवल यादों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे हमेशा के लिए जीवित कर दिया।
उन्होंने घर के बगल में शहीद बेटे बसील टोप्पो की आदमकद प्रतिमा स्थापित की है, जिसकी वह रोज उसी ममता से देखभाल करती हैं, जैसे बचपन में बेटे की करती थीं। सुबह उठते ही सफियामा अपने बेटे की प्रतिमा की सफाई करती हैं और उस पर प्यार बरसाती हैं। इस मार्मिक दृश्य को देखकर राह चलते लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। बसील टोप्पो, जिला पुलिस बल में जवान थे और 18 अगस्त 2011 को नक्सल प्रभावित बस्तर के भोपालपटनम और भद्रकाली पुलिस स्टेशन के बीच जंगल में हुए नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। उस समय वह छुट्टी से ड्यूटी पर लौटे सिर्फ दो दिन ही हुए थे। शहादत की खबर ने मां को स्तब्ध कर दिया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने बेटे की आदमकद प्रतिमा बनवाने का फैसला किया। ओडिशा के मूर्तिकारों की मदद से घर के बगल में मंडप बनाकर प्रतिमा स्थापित की गई।
पेरवाआरा गांव में रक्षाबंधन का त्योहार भी शहीद बसील टोप्पो की याद में खास तरीके से मनाया जाता है। यहां की बहनें हर साल पहले शहीद भाई की प्रतिमा को राखी बांधती हैं, फिर अपने बाकी भाइयों को रक्षा सूत्र पहनाती हैं। यह परंपरा पिछले 17 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है।
गांव के लोगों का कहना है कि बसील टोप्पो की बहादुरी और बलिदान हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
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