
CG Mirror News
जशपुर :- जिले के दुलदुला तहसील क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन और डंपिंग का मामला, हल्दीमुण्डा-रायटोली क्षेत्र में बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण किए जाने की बात सामने आई है । आरोप है कि कोरंगा क्षेत्र से ईब नदी से रेत निकालकर हजारों मीट्रिक टन रेत यहां लाकर जमा की गई है। और यहाँ से अन्य राज्य ओड़िसा झारखण्ड सप्लाई अधिक किम्मत 5 हजार रुपये मे ट्रैक्टर का ट्राली भर के भेजा जा रहा है।
सबसे गंभीर सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जिस स्थान पर रेत का डंपिंग यार्ड बनाए जाने की बात कही जा रही है, वह क्षेत्र रिजर्व फॉरेस्ट से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक रेत ईंट के कारोबारी द्वारा जंगल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में यह भूमि रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र के अंतर्गत आती है, तो वहां बिना सक्षम अनुमति के रेत का डंपिंग यार्ड संचालित किया जाना गंभीर मामला हो सकता है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत जंगल क्षेत्र तक कैसे पहुंची? क्या रेत के भंडारण के लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई है? क्या डंपिंग यार्ड के लिए कोई वैध लीज अथवा स्वीकृति मौजूद है? और यदि अनुमति नहीं है तो इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण किसकी निगरानी में होता रहा
आरोप है कि कोरंगा के ईब नदी क्षेत्र से रेत निकालकर वाहनों के माध्यम से हल्दीमुण्डा-रायटोली तक पहुंचाई जा रही है। यदि नदी से रेत का उत्खनन स्वीकृत खनन क्षेत्र से बाहर किया गया है या निर्धारित अनुमति के विपरीत किया गया है, तो इसकी जांच आवश्यक है। वहीं, जंगल क्षेत्र में रेत जमा किए जाने से वन भूमि के उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौके पर बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण दिखाई देता है। उनका आरोप है कि लंबे समय से इस गतिविधि पर कार्रवाई नहीं होने से रेत कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों ने संबंधित राजस्व, खनिज और वन विभाग से मौके का संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग की है।
लोगों की मांग है कि अधिकारियों द्वारा डंपिंग स्थल की भूमि का रिकॉर्ड जांचा जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि जमीन किस मद में दर्ज है। साथ ही डंपिंग के लिए किसी प्रकार की लीज, अनुमति या स्वीकृति जारी हुई है या नहीं, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जाए। ईब नदी से रेत निकासी के मामले में भी खनन क्षेत्र, अनुमति, मात्रा और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग उठ रही है।
अब देखने वाली बात होगी कि संबंधित विभाग इस मामले में मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं। यदि जांच में बिना अनुमति रेत का उत्खनन अथवा वन क्षेत्र में अवैध डंपिंग पाए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता होगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों मीट्रिक टन रेत के इस कथित डंपिंग यार्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जमीन किसकी है, अनुमति किसकी है और इतनी बड़ी मात्रा में रेत आखिर किसकी निगरानी में जमा होती रही? इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग की जांच से ही सामने आएगा।
आप को बता दें कि रिजर्व फारेस्ट से डंपिंग कर जगह जगह जेसीबी के माध्य से लोड कर झराखंड भी भेजा जा रहा है अधिक मूल्य मे.जिससे राजस्व का चुना खनिज विभाग को लग रहा है।
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