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Mirror News : पहले एक साथ खरीदते हैं सिंदूर फिर दूल्हा-दुल्हन भरते हैं एक-दूसरे की मांग…जरूर पढ़ें पूरी खबर 

Mirror News : पहले एक साथ खरीदते हैं सिंदूर फिर दूल्हा-दुल्हन भरते हैं एक-दूसरे की मांग...जरूर पढ़ें पूरी खबर 

Mirror News : पहले एक साथ खरीदते हैं सिंदूर फिर दूल्हा-दुल्हन भरते हैं एक-दूसरे की मांग…जरूर पढ़ें 

सुदूर वनांचल जशपुर जिले में बसी उरांव जनजाति में विवाह की एक अनूठी परंपरा है। इसमें विवाह के समय दूल्हा और दुल्हन दोनों एक-दूसरे की मांग में सिंदूर भरते हैं। समाज के लोगों की मान्यता है कि इससे दंपती को वैवाहिक रिश्तों में बराबरी का एहसास होता है। विवाह के दौरान घर के आसपास स्थित बगीचे में दूल्हा आमंत्रण का इंतजार करता है और जब दुल्हन के रिश्तेदार दूल्हे को कांधे पर बैठाकर मंडप में लाते हैं तो यह रस्म पूरी की जाती है।

इसमें दुल्हन के भाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वह बहन की अंगुली पकड़ता है और दुल्हन उसके सहारे दूल्हे को बिना देखे यानी पीछे की ओर हाथ करके सिंदूर भरती है। यदि दुल्हन का कोई भाई नहीं है तो यह रस्म बहन पूरी करती है। उरांव संस्कृति के जानकार राधेश्वर प्रधान बताते हैं कि दोनों तीन-तीन बार एक-दूसरे की मांग पर सिंदूर भरते हैं। रिश्तों की मजबूती के लिए इस दौरान कई बातों का गंभीरतापूर्वक ध्यान रखा जाता है। पंच के रूप में गांव के पांच वरिष्ठ सदस्य चादर से एक घेरा बनाते हैं।

उसके अंदर कुछ खास रिश्तेदार बतौर गवाह होते हैं और बुजुर्ग बाहर से बार-बार आवाज देते हैं कि एक बार और अच्छे से एक-दूसरे को देख लो, जान लो फिर सिंदूर भरना। समाज के वरिष्टजन कहना है कि इस रस्म में भाई के रिश्तों की मजबूती भी झलकती है।

हाल ही में शादी हुए एक दाम्पत जोड़े ने बताया कि यह परंपरा उनके लिए महत्वपूर्ण है और बराबरी का रिश्ता होने का एहसास भी उन्हें होता है। विवाह के पूर्व सिंदूर गोतिया की रस्म होती है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों साथ में सिंदूर खरीदने जाते हैं।

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Mukesh Nayak

Editer - Mukesh Nayak Jashpur (Cg) www.mukeshnk60@gmail.com

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