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जशपुर । जिले में मोबाइल नेटवर्क की बदहाल स्थिति अब लोगों के लिए गंभीर परेशानी बनती जा रही है। खासकर ग्रामीण इलाकों में Jio नेटवर्क की कमजोर कनेक्टिविटी से उपभोक्ता परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि कई जगह टावर के महज 100 मीटर के दायरे में रहने के बावजूद मोबाइल में नेटवर्क या तो बेहद कमजोर रहता है या इंटरनेट काम करना बंद कर देता है। सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब बिजली गुल होते ही मोबाइल नेटवर्क भी गायब हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल कंपनियां 4G और 5G की तेज इंटरनेट सेवा का दावा करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई जगह इसके बिल्कुल उलट है। उपभोक्ता 5G का रिचार्ज करा रहे हैं, लेकिन इंटरनेट की स्पीड कई बार इतनी धीमी होती है कि लोग इसे 2G जैसी स्पीड बता रहे हैं। वेबसाइट खुलने, वीडियो चलने, ऑनलाइन फॉर्म भरने और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने तक में काफी समय लग जाता है।
बिजली गई तो नेटवर्क भी गया!
जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में एक और गंभीर समस्या सामने आ रही है। जैसे ही बिजली बंद होती है, मोबाइल नेटवर्क भी कमजोर पड़ जाता है या पूरी तरह गायब हो जाता है। ऐसे में बिजली कटौती के दौरान ग्रामीणों के लिए मोबाइल से संपर्क करना तक मुश्किल हो जाता है।
लोगों का सवाल है कि यदि मोबाइल टावरों में पर्याप्त बैकअप व्यवस्था है तो बिजली जाते ही नेटवर्क क्यों प्रभावित होता है? क्या टावरों में पर्याप्त बैटरी या वैकल्पिक बिजली व्यवस्था नहीं है? ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा है।
टावर पास, फिर भी नेटवर्क दूर
कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव के आसपास मोबाइल टावर मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद नेटवर्क की स्थिति खराब है। कॉल करने के लिए घर से बाहर या ऊंचे स्थान पर जाना पड़ता है। इंटरनेट चलाने के लिए लोग मोबाइल लेकर इधर-उधर घूमते नजर आते हैं।
नेटवर्क की खराब स्थिति का सीधा असर ऑनलाइन पढ़ाई, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, नौकरी के आवेदन, छात्रवृत्ति, परीक्षा फॉर्म, आधार संबंधी कार्य और ऑनलाइन शिकायतों पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अधिकांश सरकारी सेवाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं, वहां कमजोर नेटवर्क लोगों के लिए बड़ी बाधा बन गया है।
Jio Fiber भी दे रहा झटका
मोबाइल नेटवर्क के साथ कुछ क्षेत्रों में Jio Fiber ब्रॉडबैंड सेवा को लेकर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। इंटरनेट स्पीड कम होने, कनेक्शन बाधित होने और बार-बार सेवा प्रभावित होने की शिकायतें बताई जा रही हैं। बिजली जाने के बाद ब्रॉडबैंड सेवा प्रभावित होने से घर और छोटे व्यवसायों का ऑनलाइन काम भी रुक जाता है।
BSNL का टावर है, नेटवर्क नहीं
दूसरी ओर BSNL की स्थिति भी कई ग्रामीण इलाकों में संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार कई जगह टावर तो दिखाई देता है, लेकिन नेटवर्क की उपलब्धता भरोसेमंद नहीं है। वहीं Idea/Vodafone की कनेक्टिविटी भी कई क्षेत्रों में कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में ग्रामीण उपभोक्ताओं के सामने बेहतर नेटवर्क का विकल्प सीमित होता जा रहा है।
डिजिटल इंडिया के दौर में नेटवर्क की यह हालत क्यों?
आज बैंक से लेकर स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और रोजगार से जुड़े अधिकांश काम ऑनलाइन हो चुके हैं। ऐसे में नेटवर्क की समस्या केवल मोबाइल इंटरनेट की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और जरूरी सेवाओं तक पहुंच का सवाल बन चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि महंगे रिचार्ज लेने के बावजूद यदि नेटवर्क और इंटरनेट की सुविधा भरोसेमंद नहीं है तो आखिर उपभोक्ता जाएं तो जाएं कहां?
अब बड़ा सवाल यह है कि जशपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा? बिजली जाते ही नेटवर्क क्यों गायब हो जाता है? टावरों में पर्याप्त बैकअप व्यवस्था क्यों नहीं है? और 5G के दौर में ग्रामीणों को 2G जैसी स्पीड से कब तक संतोष करना पड़ेगा?
उपभोक्ताओं की मांग है कि संबंधित दूरसंचार कंपनियां जिले के कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों का तकनीकी सर्वे कराएं, टावरों की क्षमता बढ़ाएं, पर्याप्त बैकअप पावर की व्यवस्था करें और 4G-5G सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाएं। क्योंकि नेटवर्क आज सुविधा नहीं, जरूरत बन चुका है और नेटवर्क के बिना ग्रामीण विकास की डिजिटल तस्वीर अधूरी है।
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