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बेपरवाही और लाचारी के बीच तड़पती सांसें: दुलदुला रोड पर भीषण हादसा, रेफरल के फेर में फंसा अज्ञात युवक; कुनकुरी CHC की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल।

बेपरवाही और लाचारी के बीच तड़पती सांसें: दुलदुला रोड पर भीषण हादसा, रेफरल के फेर में फंसा अज्ञात युवक; कुनकुरी CHC की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल।


कुनकुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत लोटा पानी के पास दुलदुला रोड पर शुक्रवार की सुबह लगभग 8 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार पिकअप की चपेट में आने से एक अज्ञात मोटरसाइकिल सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। समाचार लिखे जाने तक घायल युवक की पहचान नहीं हो सकी है और उसकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है।
​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय बाइक सवार ने हेलमेट नहीं पहना था, जिससे उसके सिर में काफी गंभीर चोट आई है। घटना के तुरंत बाद Dial 112 और 108 एम्बुलेंस की मदद से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुनकुरी लाया गया। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. कोमल जायसवाल ने प्राथमिक जांच के बाद मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल होली क्रॉस अस्पताल ले जाने की सलाह दी। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सरकारी तंत्र और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी।

*​नियमों के भंवर में उलझी जिंदगी*

​मरीज को तत्काल उच्च स्वास्थ्य केंद्र स्थानांतरित करने की आवश्यकता थी, पर सरकारी नियमों और संसाधनों की कमी के चलते घंटों खींचतान चलती रही। डॉक्टर द्वारा 112 वाहन से मरीज को होलीक्रॉस हॉस्पिटल ले जाने के निर्देश पर स्टाफ ने बताया कि उनकी गाड़ी में ऐसी कोई मेडिकल व्यवस्था नहीं है, जिससे गंभीर रूप से घायल मरीज को सुरक्षित तरीके से दूसरे अस्पताल तक पहुँचाया जा सके।
वहीं दूसरी ओर 108 एम्बुलेंस के परिचालन नियमों के अनुसार, वाहन किसी भी मरीज को निजी अस्पताल (जैसे होली क्रॉस) में न तो भर्ती कराने ले जा सकता है और न ही वहां से किसी मरीज को बाहर निकाल सकता है।
​इस तकनीकी और प्रशासनिक पेंच के बीच गंभीर रूप से घायल अज्ञात युवक तड़पता रहा और कीमती वक्त हाथ से निकलता गया।

*​यक्ष प्रश्न: क्या हेलमेट न पहनने की सजा ‘मौत’ है?*

​इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि बाइक सवार ने हेलमेट न पहनकर लापरवाही बरती थी। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या केवल इस लापरवाही के कारण हमारी मानवीय संवेदनाएं खत्म हो जानी चाहिए? या फिर हमारी जीवन रक्षक प्रणाली को इतना सुलभ और सक्षम होना चाहिए कि हर नागरिक की जान बचाई जा सके?
​यह एक ऐसा सवाल है, जिसका सीधा और स्पष्ट जवाब प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए।

*​जशपुर के ‘हृदय स्थल’ में बुनियादी सुविधाओं का अकाल*
​कुनकुरी को जशपुर जिले का हृदय स्थल माना जाता है, जहाँ नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों का बड़ा जाल बिछा हुआ है। आए दिन यहाँ भयावह हादसे होते हैं। बावजूद इसके, स्थानीय CHC में आपातकालीन सुविधाओं का घोर अभाव है।
मौके पर मौजूद ​क्षेत्रवासियों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन एक तरफ तो हेलमेट और यातायात सुरक्षा के नाम पर बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चलाता है, लेकिन दूसरी तरफ हादसों के बाद जीवन बचाने के लिए जरूरी इमरजेंसी सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त है। यदि कुनकुरी CHC में आधुनिक इमरजेंसी वार्ड, वेंटिलेटर, क्रिटिकल केयर सुविधाएं और ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध हो, तो कई अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं।
​जनता का स्पष्ट मानना है कि जब तक अस्पतालों में जीवन रक्षक प्रणाली सुलभ नहीं होगी, तब तक केवल जागरूकता अभियानों के ढोल पीटने से हादसों में होने वाली मौतों को रोक पाना असंभव है।

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Mukesh Nayak

Editer - Mukesh Nayak Jashpur (Cg) www.mukeshnk60@gmail.com

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