
सड़क के अभाव ने फिर ली इम्तिहान: सर्पदंश पीड़िता को 2 किलोमीटर पीठ पर ढोया, विकास के दावों की खुली पोल, सरकार की नाकामी का खामियाज़ा भुगत रहे ग्रामीण।
जशपुर: जिले के बगीचा विकासखंड के मरंगी ग्राम पंचायत में सड़क की जर्जर हालत ने एक बार फिर इंसानियत को मजबूर कर दिया। चुरीलकोना गांव में रविवार को सांप के काटने से एक महिला की तबीयत बिगड़ गई। लेकिन गाँव तक न तो एंबुलेंस जा सकती है और न ही कोई वाहन। नतीजा यह हुआ कि गाँव की ही एक महिला ने उसे अपनी पीठ पर लादकर करीब 2 किलोमीटर ऊबड़-खाबड़ रास्ते से पैदल मुख्य सड़क तक पहुँचाया। वहाँ मौजूद एक निजी वाहन से उसे सन्ना अस्पताल भेजा गया, जहाँ इलाज जारी है।
यह घटना सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीणों की कहानी है जो हर रोज सरकार की लापरवाही का खामियाज़ा भुगत रहे हैं। पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहाँ गंभीर मरीज हों या गर्भवती महिलाएँ, सड़क तक पहुँचने के लिए उन्हें खाट, पालकी या किसी की पीठ का सहारा लेना पड़ता है।
केंद्र और राज्य सरकारें लगातार योजनाओं के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती हैं। पीएम जनमन योजना के तहत सड़कों का वादा हुआ, लेकिन चुरीलकोना जैसे गाँव अब भी विकास से कोसों दूर हैं। ग्रामीण कहते हैं कि कागजों में सड़क बन चुकी होगी, लेकिन ज़मीन पर उनकी ज़िंदगी अब भी पगडंडी और पहाड़ी रास्तों में उलझी है।
हकीकत यह है कि सरकार की नाकामी का खामियाज़ा सीधे ग्रामीणों की ज़िंदगी पर पड़ रहा है। यह सवाल आज भी जस का तस है कि क्या 21वीं सदी का भारत अब भी अपनी ही जनता को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा देने में नाकाम रहेगा?
Views: 0




