
रसोइया की तबीयत बिगड़ी तो शिक्षक ने कक्षा को बना दिया रसोईघर, बच्चों के लिए वहीं बनाई मैगी
जशपुर जिले के विकासखंड दुलदुला अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला साजापानी में मंगलवार को एक शिक्षक की संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल देखने को मिली। विद्यालय की रसोइया की अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण वह स्कूल नहीं पहुंच सकी, जिससे मध्यान भोजन नहीं बन पाया। ऐसे में बच्चों को भूखा छोड़ने के बजाय शिक्षक मुरलीधर यादव ने कक्षा को ही अस्थायी रसोई बना दिया और वहीं मैगी तैयार कर सभी बच्चों को खिलाया।
जानकारी के अनुसार, सुबह रसोइया के अस्वस्थ होने की सूचना मिलने के बाद विद्यालय में मध्यान भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो गई। बच्चों के सामने भोजन की समस्या खड़ी हो गई थी। ऐसे समय में शिक्षक मुरलीधर यादव ने बिना किसी देरी के स्वयं जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने कक्षा में ही उपलब्ध व्यवस्था के बीच बच्चों के लिए मैगी तैयार की, ताकि किसी भी बच्चे को खाली पेट न रहना पड़े।
शिक्षक मुरलीधर यादव ने बताया कि रसोइया की तबीयत अचानक खराब होने के कारण वह विद्यालय नहीं आ सकी। बच्चों को बिना भोजन के रखना उचित नहीं लगा, इसलिए तत्काल कक्षा में ही मैगी बनाकर सभी बच्चों को खिलाया गया।
शिक्षक का यह प्रयास केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बच्चों के प्रति उनके अपनत्व और जिम्मेदारी का परिचायक भी था। बच्चों ने भी खुशी-खुशी भोजन किया और शिक्षक के इस व्यवहार की सराहना की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में ऐसे शिक्षक कम ही देखने को मिलते हैं, जो अपनी जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर बच्चों की हर जरूरत का ध्यान रखते हैं। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, शिक्षक ने यह साबित कर दिया कि बच्चों का हित सर्वोपरि है।
यह घटना इस बात का भी संकेत देती है कि आपात स्थिति में मध्यान भोजन योजना के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होना आवश्यक है। हालांकि, इस कठिन परिस्थिति में शिक्षक मुरलीधर यादव ने जिस तत्परता और मानवीय सोच का परिचय दिया, उसने बच्चों को भूखा नहीं रहने दिया और एक शिक्षक के वास्तविक दायित्व को भी उजागर किया।
कक्षा में ब्लैकबोर्ड और किताबों के बीच जब शिक्षक ने अपने हाथों से मैगी बनाकर बच्चों को खिलाया, तो वह दृश्य केवल भोजन का नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और मानवता का जीवंत उदाहरण बन गया।
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