
CG Mirror News
जशपुर:- चरईडांड – बतौली राज्य मार्ग में सरपकोम्बो से भीतघरा बतोली तक चल रहे सड़क, पुल और तटबंध निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। लाखों-करोड़ों रुपए की लागत से बन रहे आधा दर्जन पुल-तटबंधों में भारी गड़बड़ी,का मामला अमानक निर्माण और विभागीय लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि, निर्माण कार्य में तकनीकी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, लेकिन लोकनिर्माण विभाग के जिम्मेदार विभागीय अधिकारी सब कुछ देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं।
यह मार्ग राज्य मार्ग होने के साथ भारी और ओवरलोड वाहनों के आवागमन वाला प्रमुख रास्ता है। प्रतिदिन इस मार्ग से भारी ट्रक, हाईवा और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मार्ग में मजबूत और गुणवत्तायुक्त पुल-तटबंध निर्माण आवश्यक माना जाता है, लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई पुल-तटबंधों में बिना पर्याप्त बेस सरिया डाले ही ढलाई कराई जा रही है। वहीं ढलाई कार्य में वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बिना वाइब्रेटर ढलाई करने से कंक्रीट के भीतर खाली स्थान रह जाते हैं, जिससे निर्माण कमजोर हो जाता है और भविष्य में दरार, धंसाव तथा टूट-फूट की संभावना बढ़ जाती है। निर्माण कार्य में घटिया गिट्टी, कमजोर सीमेंट मिश्रण और अमानक मटेरियल उपयोग किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद मौके पर निर्माण गुणवत्ता बेहद खराब दिखाई दे रही है। कई स्थानों पर पुल-तटबंध निर्माण केवल खानापूर्ति जैसा नजर आ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक निर्माण कार्य जशपुर के एक ठेकेदार को मिला है, लेकिन बाद में पूरा काम पेटी कांट्रेक्ट में दूसरे को राजू बंगाली को सौंप दिया गया । आरोप है कि , लागत बचाने और अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। ग्रामीणों ने विभागीय इंजीनियरों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही और न ही गुणवत्ता की सही जांच की जा रही है। यदि अधिकारी समय-समय पर स्थल निरीक्षण करते तो इस प्रकार की अनियमितता सामने नहीं आती। विभागीय अनदेखी के कारण निर्माण एजेंसी मनमानी तरीके से कार्य कर रही है। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि बरसात और ओवरलोड वाहनों के दबाव में कमजोर पुल-तटबंध भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण सामग्री की लैब टेस्टिंग तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो लाखों-करोड़ों रुपए की यह परियोजना विकास की जगह भ्रष्टाचार, लापरवाही और विभागीय मिलीभगत की पहचान बन जाएगी।
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