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जशपुर। ग्रामीण विकास योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालने वाले पंचायत सचिव अब अपने कथित निजी नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों को लेकर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। सीमाबारी पंचायत में पदस्थ सचिव भोजराम चौहान और तुमला पंचायत के सचिव दिनेश चौहान पर सोशल मीडिया के जरिए हर्बल लाइफ नेटवर्क मार्केटिंग के एजेंट के रूप में सक्रिय होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
मामले ने अब क्षेत्र में प्रशासनिक हलकों से लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा का माहौल गर्म कर दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीमाबारी पंचायत के सचिव भोजराम चौहान ने एक स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप “न्यू महाकाली वर्क ग्रुप” में कई पोस्ट साझा किए हैं। इन पोस्टों में कथित तौर पर हर्बल लाइफ नेटवर्क मार्केटिंग ग्रुप से जुड़ने, लोगों को जोड़ने और नेटवर्क विस्तार से संबंधित बातें खुलकर दिखाई दे रही हैं। वायरल पोस्टों को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि एक सरकारी कर्मचारी द्वारा इस तरह निजी नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों का प्रचार करना गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं तुमला पंचायत के सचिव दिनेश चौहान भी फेसबुक पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। फेसबुक पर उनके द्वारा साझा किए गए कई पोस्ट में हर्बल उत्पादों के फायदे बताए गए हैं। इतना ही नहीं, कुछ पोस्ट ऐसे भी बताए जा रहे हैं जिनमें लोगों को इस नेटवर्क से जुड़ने और व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन गतिविधियों को देखकर अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या दोनों सचिव सरकारी जिम्मेदारियों से ज्यादा हर्बल लाइफ नेटवर्क मार्केटिंग के काम में सक्रिय हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत कार्यालय में कई बार सचिवों की अनुपस्थिति देखने को मिलती है। पंचायत के जरूरी दस्तावेज, प्रमाण पत्र, योजनाओं की जानकारी और अन्य प्रशासनिक कार्य समय पर नहीं हो पाते, जिससे आम ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आरोप यह भी है कि विभागीय बैठकों और पंचायत कार्यों से समय निकालकर दोनों सचिव नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कई कार्य समय पर नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। पंचायत कार्यालय में कई बार सचिव उपलब्ध नहीं रहते, जिससे जरूरी कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं ग्रामीणों ने इस पूरे मामले को गलत बताते हुए कहा कि पंचायत कार्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि निजी नेटवर्क मार्केटिंग गतिविधियों को।
सूत्रों का दावा है कि कई बार दोनों सचिव पंचायत कार्य से छुट्टी लेकर बाहर कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट और वायरल तस्वीरों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब यह मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सरकारी सेवा नियमों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
गौरतलब है कि पंचायत सचिव का पद गांव की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। गांवों में निर्माण कार्यों की निगरानी, शासन की योजनाओं का संचालन, हितग्राहियों को लाभ पहुंचाना, रिकॉर्ड संधारण और ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान सचिवों की अहम जिम्मेदारी होती है। ऐसे में यदि कोई सरकारी कर्मचारी निजी नेटवर्क मार्केटिंग व्यवसाय में सक्रिय पाया जाता है और उसका असर शासकीय कार्यों पर पड़ता है, तो यह सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।
अब क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे हैं? क्या सरकारी समय और पद का उपयोग निजी नेटवर्क मार्केटिंग को बढ़ावा देने में किया जा रहा है? और क्या संबंधित विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेगा?
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मामले की गंभीर जांच कर कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सचिवों पर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि पंचायत व्यवस्था की साख बनी रहे और सरकारी जिम्मेदारियों का दुरुपयोग न हो।
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया में वायरल पोस्ट, व्हाट्सएप ग्रुप की गतिविधियां और फेसबुक प्रचार अब पंचायत व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में जांच कर कार्रवाई होती है या मामला केवल सोशल मीडिया बहस तक सीमित रह जाएगा।
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