
मुख्यमंत्री ने की जशपुर पुलिस की नाट्य प्रस्तुति “दंड से न्याय की ओर” की सराहना नए आपराधिक कानूनों की जीवंत झलक बनी राज्योत्सव की शान।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर नए रायपुर में आयोजित भव्य राज्योत्सव कार्यक्रम में पुलिस विभाग द्वारा प्रस्तुत नाटक “दंड से न्याय की ओर” ने दर्शकों का दिल जीत लिया। नए आपराधिक कानूनों पर आधारित यह नाट्य प्रस्तुति ज्ञानवर्धक और आकर्षक दोनों है, जो प्रतिदिन राज्योत्सव के पुलिस पंडाल में मंचित की जा रही है और दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
इस नाटक का निर्देशन एसएसपी जशपुर श्री शशि मोहन सिंह ने किया है, जबकि जशपुर के प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक डॉ. आनंद पांडेय ने सहायक निर्देशन का कार्य संभाला। नाटक का अवलोकन स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया और इसकी प्रस्तुति की खुलकर प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ जनजागरूकता का प्रभावी माध्यम हैं, जो लोगों को नए कानूनों की जानकारी सहज और रोचक रूप में देती हैं।”
नाटक की परिकल्पना डीजीपी श्री अरुण देव गौतम की रही, जिसे आईजी श्री ध्रुव गुप्ता ने साकार किया। यह प्रस्तुति नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) पर आधारित है।
कुल दस सीनों में विभाजित इस नाटक की शुरुआत एक डकैती और हत्या की घटना से होती है, जिसमें एफआईआर दर्ज होने से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक की पूरी न्यायिक प्रक्रिया को मंच पर जीवंत किया गया है। इसमें सभी पात्र वास्तविक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी हैं किसी ने थानेदार, तो किसी ने फॉरेंसिक अधिकारी, अधिवक्ता या न्यायाधीश की भूमिका निभाई।
नाटक में दिखाया गया कि कैसे आधुनिक तकनीकी साक्ष्य फिंगरप्रिंट, डीएनए टेस्ट, वॉइस सैंपल आदि अब न्यायिक जांच का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। नए कानूनों के अंतर्गत एफआईआर से लेकर निर्णय तक की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी होती है 70 दिनों में पुलिस जांच और 90 दिनों में अदालत का फैसला।
नाटक के माध्यम से ई-साक्ष्य ऐप, CCTNS सिस्टम, NAFIS और Crime Multi Agency Centre जैसे आधुनिक साधनों की भूमिका को भी समझाया गया। इंस्पेक्टर किरण ठाकुर और एएसआई संतराम साहू के पात्रों के जरिये दिखाया गया कि डिजिटल तकनीक कैसे अपराध की जांच को पारदर्शी और त्वरित बनाती है।
इंस्पेक्टर किरण ठाकुर की भूमिका पुलिस मुख्यालय रायपुर में पदस्थ ज्योति पांडेय ने निभाई, जबकि स.उ.नि. संदीप देशमुख (राजनांदगांव) ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। नाटक में शामिल लगभग 30 कलाकारों को लगातार दर्शकों की सराहना मिल रही है।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि नए कानूनों का उद्देश्य सिर्फ “दंड” देना नहीं, बल्कि “न्याय को तीव्र, पारदर्शी और मानवीय बनाना” है। इस नाट्य प्रस्तुति ने दिखाया कि जब कानून और संवेदना साथ चलते हैं, तो न्याय अधिक सशक्त और मानवीय बनता है।
नाटक की सफलता में डीआईजी सीआईडी श्री प्रखर पांडेय, एआईजी श्री विवेक शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती वर्षा मिश्रा, डीएसपी डॉ. प्रमिला और अन्य अधिकारियों का विशेष योगदान रहा।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया “हमारे नाटक ‘दंड से न्याय की ओर’ को जनता का भरपूर प्यार मिल रहा है। दर्शक न सिर्फ प्रस्तुति का आनंद ले रहे हैं बल्कि संवाद सत्र में यह भी कह रहे हैं कि नये कानून की जानकारी उन्हें अब बहुत सरलता से समझ में आ रही है।”
इस प्रभावशाली प्रस्तुति ने साबित किया कि छत्तीसगढ़ पुलिस न केवल कानून की रक्षा करती है, बल्कि समाज को उसके प्रति जागरूक भी करती है दंड से न्याय की ओर, एक नई सोच, एक नया भारत।
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