
CG Mirror News
रायगढ़ पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर तोड़ दी है। “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर एक रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख 28 हजार रुपये ठगने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में बैंगलूरू से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मास्टरमाइंड दुबई से पूरे गिरोह को ऑपरेट कर रहा था।
मामला थाना पुसौर क्षेत्र का है, जहां 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक को खुद को CBI अधिकारी बताने वाले ठगों ने कॉल कर डराया-धमकाया। आरोपियों ने कहा कि उनके नाम से मुंबई में फर्जी खाता खुला है और जांच के नाम पर रकम “CBI अकाउंट” में ट्रांसफर करनी होगी। भय के माहौल में पीड़ित ने 25 से 29 अक्टूबर 2025 के बीच 12 किस्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।
शिकायत मिलते ही रायगढ़ पुलिस हरकत में आई और तकनीकी जांच के जरिए बैंक खातों, यूपीआई आईडी और मोबाइल नंबरों की गहराई से पड़ताल शुरू की। जांच में सुराग बैंगलूरू तक पहुंचे, जहां पुलिस टीम ने दबिश देकर विग्नेश पी और स्टीफन थॉमस को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल मोबाइल भी जब्त किए गए हैं।
पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड फिरोज खान उर्फ डॉम्निक दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। वह फर्जी दस्तावेजों और वीजा प्रक्रिया का दुरुपयोग कर लोगों को जाल में फंसाता था। गिरोह डिजिटल अरेस्ट, आधार-सिम लिंकिंग, फर्जी लोन ऐप और क्रिप्टो निवेश जैसे तरीकों से देशभर में ठगी कर रहा था। रायगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खातों में जमा 17 लाख से अधिक की राशि होल्ड करवा दी है, जिससे पीड़ित को राहत मिलने की उम्मीद है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस सफलता पर कहा कि यह कार्रवाई प्रोफेशनल और तकनीकी तरीके से की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से सावधान रहें। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती यह सिर्फ ठगी का नया तरीका है। यह मामला साफ करता है कि साइबर अपराधी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।
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