
CG MIRROR NEWS
खबरें जरा हट के…
जशपुर – छत्तीगढ़ की ऐतिहासिक नगरी जशपुर जो अघोरेश्वर अवधुत भगवान राम जी की नगरी के नाम से जानी जाती है। यहां का सोगड़ा गम्हरिया अघोरपीठ विश्व विख्यात है. परंतु दुर्भाग्य है कि, देश को आजाद हुए 77 साल हो चुके हैं। फिर भी जशपुर जिले के कई गाँव ऐसे हैँ जहाँ प्राणरहित देह के अंतिम यात्रा के लिए मुक्ति धाम भी नसीब नहीं है. खुले में यहाँ अंत्येष्टि संस्कार किया जाता है. आप को बता दें कि ज़ब कोई गाँव का व्यक्ति मर जाता है तो शांतिपूर्वक उसका अंतिम संस्कार भी नहीं हो पाता जहाँ घाट है वहा तक कई गाँव में सड़क नहीं, न ही कोई सुविधा है। ऐसे कई गाँव है जहाँ श्मशान घाट तक नहीं है सर्दी में तो किसी तरह अंतिम संस्कार क़र लेते पर बारिश या भयंकर गर्मी में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार होता है तो उसकी आत्मा धूप में और बरसात में कराह उठती है. और उसके अंतिम संस्कार में जाने वाले लोग भी परेशान होते हैं। मगर नेताओं एवं प्रशासनिक अधिकारियों का कभी ध्यान नहीं जाता और लोग हमेशा परेशान हैं आज भी कई गाँव जशपुर जिले में ऐसे हैं जहाँ मौत के बाद भी मृत शरीर को अंत्येष्टि संस्कार के लिए मुक्ति धाम नसीब नहीं है लोगों का मानना है कि सरकार लाखों करोड़ो के कई योजना बना रही पर इस विषय पर किसी का ध्यान ही नहीं जाता है कि मृत्यु के बाद कम से कम मरणलोक में अंत्येष्टि संस्कार अंतिम संस्कार तो अच्छे से हो, गांवों में अगर कोई किसी कारण बस स्वर्ग सिधार जाता है तो वह या तो अपनी खुद की जमीन पर, या फिर गांव की नदी नाले किनारे खुले मैदान में ही चिता में जलता नजर आता है । गांवों में विकास कार्यों के लिए न केवल पंचायतें हीं बल्कि जिला पंचायत अध्यक्ष, सदस्य, जनपद अध्यक्ष, सदस्य, विधायक निधि, सांसद निधि, जनभागीदारी आदि से भी विकास कार्य कराए जाते हैं। लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधि खास खास जगहों पर ही धनराशि खर्च कर काम कराते हैं। सर्दी के मौसम में तो चिता जलने में ज्यादा समय नहीं लगता, लेकिन बरसात में जब बारिश की झड़ी हो और ऐसे में कोई स्वर्ग सिधार जाए तो उसका दाह संस्कार करना मुश्किल होता है। कई पंचायतों में श्मशान घाट की जमीन चिन्हित ही नहीं हैं. आप को बता दें कि जिले के तीनों विधानसभा कुनकुरी, पत्थलगाँव, जशपुर में कुल 8 ब्लॉक के गांवों में शासन के रिकार्ड में नगर पंचायत के अलावे गिने चुने पंचायतों में ही श्मशान घाट बने हैं। वही जिले के लगभग सैंकड़ो गाँव, ग्राम पंचायत ऐसे हैँ जहाँ अभी तक मुक्तिधाम श्मशान घाट नही बन सका है । अब देखना है कि अंत्येष्टि संस्कार: मोक्ष की अंतिम यात्रा के लिए मुक्तिधाम का निर्माण कब होता है और प्राणरहित व्यक्ति कब मुक्ति पाते हैँ..।
जिले के कई ग्राम पंचायत, गाँव में अंत्येष्टि संस्कार: मोक्ष की अंतिम यात्रा के लिए मुक्तिधाम का निर्माण हुआ भी है तो कबाड में तब्दील है. लगभग पंचायतों में खुले में ही अंत्येष्टि संस्कार अंतिम संस्कार किया जाता है, वहीँ कई गाँव ऐसे हैँ जहाँ श्मशान घाट के लिए जमीन आबंटित नहीं है ना ही जाने का रास्ता. बड़े मशक्त से परिजन किसी तरह गाँव में विवादों के बीच घाट तक अंतिम संस्कार के लिए प्राणरहित देह को ले जाते है तब जा के विवादों के बीच अंतिम संस्कार हो पाता है अब देखना है कि, लोग इस समस्या से कब निजात पा रहे।
🔍 📝 MUKESH NAYAK (SBR) JASHPUR
Views: 0




