
विशेष लेख :- मुकेश नायक न्यूज एडिटर
CG Mirror News
जशपुर :- जिले के कुनकुरी विकासखंड अंतर्गत बेहराखार के शंकर नगर में विकास के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। यहां निवासरत बिरहोर जनजाति के 11 हितग्राही परिवार आज भी अधूरे आवास और अधूरी सुविधाओं के बीच जीवन बिताने को मजबूर हैं, जबकि कागजों में इनका काम पूर्ण दिखाकर भुगतान भी कर दिया गया है। जिन हितग्राहियों के नाम पर प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आवास और बोर खनन स्वीकृत किया गया था, उनमें दया राम, कृष्णा राम, रानी बाई, मार्टिन राम, कार्तिक राम, हदय राम, केवल साय, श्रीराम, गोपाल राम, सोयाल राम और नेहरू राम शामिल हैं। ये सभी बिरहोर परिवार हैं, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इन परिवारों के लिए स्वीकृत आवास अधूरे पड़े थे कहीं दीवार अधूरी, कहीं छत अधूरी, तो कहीं पूरा ढांचा ही अधूरा छोड़ दिया गया। इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा इन निर्माण कार्यों को पूर्ण दर्शाकर पूरा भुगतान कर दिया गया, जो गंभीर लापरवाही और अनियमितता की ओर संकेत करता है।

इसी तरह बोर खनन के मामले में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। कई स्थानों पर बोर की खुदाई कम गहराई तक की गई, जिसके कारण वे “ड्राई” हो गए और पानी की समस्या जस की तस बनी रही। इसके बावजूद ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया। अब राज्यपाल के प्रस्तावित दौरे से पहले पूरे शंकर नगर में अचानक हलचल तेज हो गई है। जिन अधूरे मकानों में लोग रहने के लायक स्थिति में भी नहीं थे, उन्हें युद्धस्तर पर तैयार कर रंग-रोगन कर दिया गया है। दीवारों पर चमकीले रंग चढ़ाए जा रहे हैं, आसपास सफाई कराई जा रही है और पूरे क्षेत्र को दिखावटी रूप से “मॉडल” बनाने की कोशिश की जा रही है।
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है जब पहले ही आवास और बोर का भुगतान हो चुका था, तो अब अचानक ये काम कैसे और किस बजट से पूरे किए जा रहे हैं? क्या यह केवल उच्चस्तरीय दौरे के पहले सच्चाई छुपाने की कोशिश है?
गांव के लोगों का कहना है कि वर्षों से वे अधूरे घरों और पानी की समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। अब जब बड़ा दौरा प्रस्तावित है, तो प्रशासन हरकत में आया है और रातों-रात व्यवस्था दुरुस्त करने में जुट गया है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पूरा मामला मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र में सामने आया है। ऐसे में यह सवाल और भी बड़ा हो जाता है कि जब इस क्षेत्र में ही इस तरह की अनियमितता हो रही है, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी।
शंकर नगर की यह तस्वीर साफ तौर पर दिखाती है कि विकास का दावा कागजों में तो पूरा है, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और जिन बिरहोर परिवारों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें उनका वास्तविक अधिकार मिले।
अन्यथा, यह “रंगीन विकास” सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगा और असली सच्चाई फिर अंधेरे में दब जाएगी।
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