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जशपुर, 29 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की दो बेटियों नेहारिका लकड़ा और नीलम यादव ने नवगुरुकुल के माध्यम से न सिर्फ अपने सपनों को नई उड़ान दी, बल्कि यह साबित कर दिया कि सही अवसर और कड़ी मेहनत से किसी भी ग्रामीण युवा का भविष्य बदला जा सकता है।
नेहारिका लकड़ा, जशपुर की रहने वाली हैं और एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता किसान हैं और माता सरकारी स्कूल में रसोइया के रूप में कार्यरत हैं। 12वीं के बाद उन्होंने नवगुरुकुल जशपुर कैंपस से प्रोग्रामिंग कोर्स किया। शुरुआत में कई बार असफलता और निराशा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नवगुरुकुल में उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ लीडरशिप, प्रोफेशनल व्यवहार और अंग्रेज़ी कम्युनिकेशन स्किल्स सीखी।
नेहारिका की पहली नौकरी Kingdom of Chess (KOC) में Customer Relationship Executive के रूप में लगी, जहाँ उन्होंने 9 महीने काम किया। इसके बाद उन्होंने जॉब स्विच कर KPS (Kusmi Public School) में कंप्यूटर टीचर के रूप में कार्यभार संभाला और आज वे आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।
वहीं दूसरी ओर, नीलम यादव ने भी नवगुरुकुल को अपने जीवन का टर्निंग पॉइंट बताया। उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई शिशु निकेतन हाई स्कूल और 12वीं गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल गामहरिया से पूरी की। स्कूल में हुए सेमिनार से उन्हें नवगुरुकुल के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने एंट्रेंस टेस्ट पास कर जशपुर कैंपस जॉइन किया।
नवगुरुकुल में एक साल की ट्रेनिंग के बाद नीलम को उमाश्री टेक्सप्लास्ट प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में जॉब ऑफर मिला। उन्होंने बताया कि यहाँ उन्हें डेटा एनालिटिक्स, अकाउंटिंग के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और आत्मविश्वास मिला, जिसने उन्हें एक सामान्य छात्रा से प्रोफेशनल बना दिया।
दोनों बेटियों ने कहा कि नवगुरुकुल सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो युवाओं को रोजगार के साथ आत्मविश्वास और जीवन की दिशा देता है।
आज नेहारिका और नीलम जैसी कहानियाँ जशपुर के हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं जहाँ मेहनत, सही मार्गदर्शन और विश्वास से सपने हकीकत बन रहे हैं।
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