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पुल के नाले में मिट्टी भरकर कब्जे का खेल, पानी बहाव का बढ़ा खतरा,आँखों के सामने सब कुछ, फिर भी जिम्मेदार बेखबर क्यों , या मिलीभगत में चल रहा है कब्जे का खेल ?

CG Mirror News

जशपुर :- पत्थलगाँव क्षेत्र के भाटामुडा अंबिकापुर रोड पर बहते नाले को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है , जहां मिट्टी डालकर नाले को पाटने और सरकारी जमीन पर कब्जा करने का खेल खुलेआम चल रहा है। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा योजनाबद्ध तरीके से नाले को खत्म किया जा रहा है, स्थानीय निवासी रनसाय सिदार ने बताया कि जगदीश प्रसाद अग्रवाल द्वारा पुल के सामने बहने वाले नाले के बड़े हिस्से में मिट्टी डलवाकर उसे बंद करने की कोशिश की गई है। इतना ही नहीं, पुल के दो गेट भी मिट्टी डालकर बंद कर दिए गए हैं, जिससे नाले का बहाव लगभग थम गया है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन बना हुआ है जिससे जल निकासी व्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नाले में लगातार मिट्टी डाली जा रही है और पुल के गेट तक बंद कर दिए गए हैं, जिससे पानी का बहाव लगभग रुक गया है। यह नाला वर्षों से क्षेत्र के लिए जल निकासी का प्रमुख माध्यम रहा है, लेकिन अब इसे पाटकर जमीन कब्जाने की कोशिश की जा रही है। बड़ी बात यह भी सामने आ रही है कि पास की लंबी-चौड़ी पुरानी सड़क पर भी कब्जा करने की साजिश रची जा रही है, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है। यदि यह साजिश सफल होती है, तो न केवल जल निकासी बल्कि आवागमन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मुख्य सड़क पर हो रही इस पूरी गतिविधि के बावजूद प्रशासन अब तक मौन है। इससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पूरे मामले को “नाले की हत्या” और “जमीन कब्जा का खेल” बताया जा रहा है । सबसे हैरानी की बात यह है कि यह पूरा मामला मुख्य सड़क अंबिकापुर रोड पर हो रहा है, जहां से रोजाना जिम्मेदार अधिकारी गुजरते हैं, बावजूद इसके अब तक किसी तरह की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी गतिविधि के बावजूद जिम्मेदार क्यों अनजान बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकती है। नाले को पाटने से न केवल बारिश के पानी की निकासी बाधित होगी, बल्कि इससे आसपास की जमीन और बस्तियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

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