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जशपुर। गोड़अम्बा में यात्री बस के ब्रेक फेल होने से हुए भीषण हादसे में 5 लोगों की मौत और 24 यात्रियों के घायल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में तो आया, लेकिन जांच अभियान के दौरान सामने आई तस्वीर ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कलेक्टर रोहित व्यास और एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देश पर रविवार को रंजीता स्टेडियम जशपुर में बसों की फिटनेस और दस्तावेजों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया गया। जिला परिवहन अधिकारी विजय निकुंज के आदेश पर जिले में संचालित सभी बस संचालकों को सुबह 10 बजे तक अपनी बसों के साथ स्टेडियम पहुंचने और फिटनेस, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र सहित सभी दस्तावेजों की जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन जांच के दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने इस पूरे अभियान को महज खानापूर्ति बनाकर रख दिया।
जांच स्थल पर केवल स्कूल बस संचालक ही अपनी बसों के साथ पहुंचे, जबकि एक भी यात्री बस वहां नहीं पहुंची। यात्री बस संचालकों की इस अनुपस्थिति ने साफ संकेत दिया कि जिले में कई बसें नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर दौड़ रही हैं। इधर बस हादसे से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि हादसे में घायल एक व्यक्ति, जो टेठेटांगर निवासी बताया जा रहा है, की शनिवार को मौत होने की खबर सामने आई है। हालांकि इस मौत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार घायल व्यक्ति को गंभीर हालत में उपचार के लिए रेफर किया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत होने की चर्चा है। प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। जांच के दौरान मनोरा क्षेत्र के एक निजी स्कूल की बस को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। जिला परिवहन अधिकारी विजय निकुंज ने बताया कि उक्त स्कूल बस का परमिट जुलाई 2025 से समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद बस सड़कों पर संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित संचालक पर जुर्माना लगाया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि परिवहन विभाग गंभीरता से जांच करे तो जिले में कई ऐसे वाहन मिल जाएंगे जो पूरी तरह अनफिट हैं। कई बसें बिना फिटनेस, बिना बीमा और बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ही यात्रियों को ढो रही हैं। लंबे समय से इन पर कार्रवाई नहीं होने के कारण बस संचालकों के हौसले बुलंद हैं। इधर वाहन फिटनेस जांच को लेकर भी जिले में नई समस्या खड़ी हो गई है। सरकार द्वारा फिटनेस जांच की प्रक्रिया निजी एजेंसी को सौंपे जाने के बाद जशपुर में संचालित फिटनेस सेंटर को बंद कर दिया गया है और अब इसे अंबिकापुर स्थानांतरित कर दिया गया है।
इस फैसले के कारण अब जशपुर जिले के छोटे-बड़े सभी वाहनों को फिटनेस जांच कराने के लिए अंबिकापुर का सफर करना पड़ेगा। इससे वाहन संचालकों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में फिटनेस सेंटर नहीं होने के कारण कई वाहन संचालक जांच से बचते हैं और अनफिट वाहन ही सड़कों पर दौड़ते रहते हैं।
इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत भी कई पुरानी और जर्जर बसें संचालित हो रही हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई बसें 20 साल से अधिक पुरानी हैं। और तकनीकी रूप से कंडम स्थिति में हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में इन्हीं बसों से यात्रियों को ढोया जा रहा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। गोड़अम्बा की दर्दनाक दुर्घटना ने जिले की परिवहन व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन केवल हादसों के बाद जांच का दिखावा करता रहेगा या वास्तव में अनफिट वाहनों और नियमों की अनदेखी करने वाले बस संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करेगा।
फिलहाल जिले के लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या परिवहन विभाग सड़कों पर दौड़ रहे खतरनाक और अनफिट वाहनों पर लगाम लगा पाएगा या फिर सब कुछ पहले की तरह ही चलता रहेगा।
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