
CG Mirror News
जशपुर, छत्तीसगढ़ में पारित “धर्म स्वतंत्र्य विधेयक 2026” के विरोध में जशपुर जिले के कुनकुरी में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला, जहां ईसाई आदिवासी महासभा के बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतरे। इस विरोध रैली में करीब 15 हजार लोगों की भागीदारी बताई गई, जिन्होंने राज्यपाल से इस विधेयक पर हस्ताक्षर न करने की मांग की। रैली की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे स्थित मैदान से हुई। इसके बाद रैली शहर के प्रमुख मार्गों जैसे बस स्टैंड, टॉकीज चौक, बाजार चौक और जय स्तंभ से होते हुए पुनः खेल मैदान पहुंची। पूरे रास्ते प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। रैली के बाद आयोजित आमसभा में समाज के विभिन्न पदाधिकारियों और वक्ताओं ने विस्तार से अपने विचार रखे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह विधेयक संविधान में प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हनन करता है। उनका कहना था कि विधेयक में धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है, जो अन्य गंभीर अपराधों के समान है और इसे अत्यधिक कठोर माना जा रहा है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इसमें आरोपी पर ही स्वयं को निर्दोष साबित करने का भार डाल दिया गया है, जो न्याय के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
वक्ताओं ने विधेयक में प्रयुक्त “प्रलोभन” जैसे शब्दों को अस्पष्ट और भ्रम पैदा करने वाला बताते हुए कहा कि इसकी स्पष्ट परिभाषा नहीं होने से किसी भी व्यक्ति या संस्था को गलत तरीके से फंसाया जा सकता है। इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए कानून को असंतुलित और पक्षपातपूर्ण करार दिया गया। सभा में यह मुद्दा भी उठाया गया कि विधेयक में पादरी, मौलवी या फादर जैसे धार्मिक व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, लेकिन हिंदू पुजारी या पंडित का जिक्र नहीं है, जिससे कानून की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। इसके अलावा आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि आजादी के पहले आदिवासियों को अलग धर्म के रूप में दर्ज किया जाता था, लेकिन अब उनकी पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है। सभा में मुख्यमंत्री पर भी आरोप लगाए गए कि वे स्वयं धर्म प्रचार में संलिप्त हैं। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक लागू होता है तो इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल के नाम एसडीएम कुनकुरी को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए इसे रोकने, राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित करने और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर निरस्त करने की मांग की गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पहले भी वर्ष 2006 में ऐसा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा पुनर्विचार के लिए लौटाया जा चुका है और वर्तमान में इस विषय पर न्यायालय में मामला विचाराधीन है। रैली और सभा के दौरान प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई थी। पूरे कार्यक्रम में पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही।
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