
शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का पर्याय बने प्रवीण कुमार पाठक राज्य पुरस्कार से सम्मानित होकर जिले का मान बढ़ाया।
जशपुर । “शिक्षा ही समाज की वास्तविक धरोहर है” – इसी मंत्र को आत्मसात करते हुए शिक्षण कार्य में लगातार नई राह गढ़ने वाले प्रवीण कुमार पाठक को राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित भव्य समारोह में माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा सचिव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और साल भेंटकर सम्मानित किया। यह अवसर न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जशपुर जिले के लिए गर्व का क्षण रहा।
प्रेरणा से बनी जीवन की राह
वर्ष 1986-87 में शिक्षकीय जीवन की शुरुआत करने वाले प्रवीण कुमार पाठक ने स्नातकोत्तर (एम.कॉम) की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद शिक्षक बनने का निर्णय लिया। उनके पिता स्व. चंद्रिका पाठक एवं मामा श्री करम दयाल मिश्रा भी शिक्षक थे। घर-परिवार के इस संस्कार और प्रेरणा ने उन्हें शिक्षा को ही जीवन का ध्येय चुनने की दिशा दी।
वनांचल से लेकर आधुनिक तकनीक तक की यात्रा
प्रवीण पाठक ने अपने कैरियर की शुरुआत विकासखंड कुनकुरी के वनांचल क्षेत्रों से की। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा का दीप जलाए रखा। इसके बाद विकासखंड जशपुर और वर्तमान में विकासखंड मनोरा में वे सेवा दे रहे हैं।
उन्होंने सदैव शिक्षा को नई तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया। उनके विद्यालय का व्हाट्सएप ग्रुप पिछले चार वर्षों से सक्रिय है, जिससे अभिभावक घर बैठे ही प्रतिदिन की पढ़ाई, गतिविधियों और बच्चों की प्रगति की जानकारी ले पाते हैं।
शिक्षा के साथ खेल और पर्यावरण का संतुलन
शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि खेल, पर्यावरण, पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा, बाल संसद और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने में भी पाठक का योगदान उल्लेखनीय रहा है। विद्यालय का बैंड और परेड पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है।
क्विज़ प्रतियोगिताएं, गणित दिवस, वृक्षारोपण, गर्ल्स पावर कार्यक्रम, मातृ-पितृ एवं अभिभावक-शिक्षक सम्मेलन जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हुआ है।
छात्रों और अभिभावकों के बीच सेतु
पाठक का सौम्य स्वभाव, सादगी और समर्पण ने उन्हें विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच एक मजबूत सेतु बना दिया है। वे सदैव यह मानते हैं कि विद्यालय और अभिभावक मिलकर ही शिक्षा की पूर्णता ला सकते हैं। इसी सोच से उन्होंने विद्यालय को नवाचारों का केंद्र बना दिया है।
सम्मान से बढ़ा जिले का गौरव
राज्य पुरस्कार प्राप्त कर प्रवीण कुमार पाठक ने न केवल अपनी मेहनत का प्रतिफल पाया है बल्कि जिले का गौरव भी बढ़ाया है। उनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि यदि समर्पण और नवाचार की भावना हो तो किसी भी छोटे से विद्यालय को आदर्श बनाया जा सकता है।
Views: 0




