
CG Mirror News
जशपुर । देशभक्ति और तिरंगे के सम्मान के उद्देश्य से मंगलवार को कुनकुरी में निकाली गई तिरंगा यात्रा आयोजन खत्म होने के बाद कई सवाल छोड़ गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि, आखिर इस आयोजन की वास्तविक कमान किसके हाथ में थी? कार्यक्रम को संगठनात्मक स्वरूप दिए जाने की चर्चा के बीच संगठन के कई प्रमुख चेहरे रैली और मंच से नदारद नजर आए । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की प्रस्तावित मौजूदगी तय थी, लेकिन उनका कार्यक्रम निरस्त होने के बाद आयोजन का पूरा नजारा ही बदला हुआ दिखाई दिया । कुनकुरी में तिरंगा यात्रा को लेकर जोरदार तैयारियां की गई थीं ।
दरअसल,सीएम श्री साय की अनुपस्थिति में धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय की अगुवाई में तिरंगा यात्रा नगर भ्रमण कार्यक्रम संपन्न हुआ। रैली शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी, लेकिन इस दौरान आयोजन की व्यवस्था और स्वरूप को लेकर कई सवाल उठते रहे। तिरंगा यात्रा में लोयला, स्वामी आत्मानंद, निर्मला कॉन्वेंट, सरस्वती शिशु मंदिर समेत करीब दो दर्जन स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी और महिला समूहों की महिलाएं भी बड़ी संख्या में रैली में शामिल नजर आईं। इससे रैली में सरकारी तंत्र और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी साफ दिखाई दी । बड़ी बात यह कि जिस आयोजन को भाजपा का संगठनात्मक कार्यक्रम बताया जा रहा था, उसमें संगठन के कई प्रमुख पदाधिकारी और चर्चित चेहरे नजर नहीं आए। इसी बीच पूर्व सांसद एवं वर्तमान पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय की रैली में गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जयस्तंभ चौक के पास उनका वाहन तथा वे स्वयं एक मोटर पार्ट्स की दुकान में बैठी नजर आईं, लेकिन नगर भ्रमण कर रही तिरंगा यात्रा में और न ही मंच मे शामिल हुईं । उनके रैली में शामिल नहीं होने की वजह क्या रही, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। इस संबंध में विधायक की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
तिरंगा यात्रा के बाद जनचर्चा में अब सबसे बड़ा सवाल आयोजन समिति को लेकर उठ रहा है। यदि यह संगठनात्मक कार्यक्रम था, तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अधिकारी-कर्मचारियों की इतनी बड़ी भागीदारी किस व्यवस्था के तहत हुई? वहीं यदि यह शासकीय आयोजन था, तो इसे संगठनात्मक स्वरूप में क्यों प्रस्तुत किया गया? कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर नगर भ्रमण के समापन तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि आयोजन समिति कौन थी और कार्यक्रम की जिम्मेदारी किसके पास थी। स्कूलों, कर्मचारियों और अन्य संस्थानों की भागीदारी किसके निर्देश पर सुनिश्चित की गई, यह सवाल भी अब चर्चा में है।
तिरंगा देश की आन-बान और शान का प्रतीक है। ऐसे में कुनकुरी की तिरंगा यात्रा के बाद उठ रहे सवाल किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आयोजन की पारदर्शिता, सरकारी तंत्र की भूमिका और कार्यक्रम में राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों से भी जुड़े हैं।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन या आयोजन से जुड़े जिम्मेदार लोग सामने आकर यह स्पष्ट करेंगे कि कुनकुरी की तिरंगा यात्रा का वास्तविक आयोजक कौन था सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों की भागीदारी किस आदेश अथवा व्यवस्था के तहत हुई? कार्यक्रम की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी
तिरंगा यात्रा समाप्त हो गई, लेकिन कुनकुरी में इसके आयोजन और बदले राजनीतिक नजारे को लेकर उठे सवाल अभी भी बाकी हैं ।
Views: 0




