
पंचायत सचिवों का गौरव दिवस: पमशाला के कंवर धाम में मनाया गया ‘सचिव दिवस’ समारोह, जनप्रतिनिधियों और सचिवों ने की एकजुट उपस्थिति
फरसाबहार,जशपुर |
प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ विकासखंड इकाई फरसाबहार द्वारा ‘सचिव दिवस’ का भव्य आयोजन पमशाला स्थित पवित्र कंवर धाम परिसर में किया गया। यह आयोजन न केवल सचिवों की सेवा और समर्पण को सम्मान देने के लिए था, बल्कि ग्राम विकास में उनकी भूमिका को रेखांकित करने का भी अवसर बना।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक एवं संसदीय सचिव श्री भरत साय उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने संबोधन में पंचायत सचिवों को शासन और ग्रामीण जनता के बीच की मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि – “सचिवों की मेहनत और ईमानदारी ही किसी भी योजना को जमीन पर सफल बनाती है। सरकार की योजनाएं उन्हीं के माध्यम से जनता तक पहुंचती हैं।”
इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद पंचायत फरसाबहार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मिथलेश कुमार पैंकरा ने की। उन्होंने सचिवों को प्रेरित करते हुए कहा कि सचिवों का कार्य जमीनी स्तर पर शासन की रीढ़ होता है, और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना ग्राम पंचायतें गतिशील नहीं हो सकतीं।
विशिष्ट अतिथियों के रूप में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमंती साय, उपाध्यक्ष श्रीमती संध्या सिंह, जनपद सदस्य श्रीमती राजकुमारी भगत, सरपंच संघ अध्यक्ष श्री कुंवर साय पैंकरा, सरपंच श्री दिलेश्वर प्रधान एवं सरपंच श्री देवदत्त निकुंज उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने सचिवों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें पंचायतों का ‘साइलेंट वॉरियर’ बताया।
कार्यक्रम में फरसाबहार ब्लॉक के सभी पंचायत सचिवों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। समारोह के दौरान सचिव संघ द्वारा अतिथियों का स्वागत पुष्पमालाओं और स्मृति चिन्हों के साथ किया गया। साथ ही कई सचिवों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया।
सचिव संघ के वक्ताओं ने अपनी मांगों और समस्याओं को भी मंच से साझा किया, जिनमें नियमितीकरण, समय पर वेतन भुगतान और कार्यभार के अनुपात में सुविधाएं शामिल थीं। मुख्य अतिथि श्री भरत साय और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि सचिवों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाया जाएगा और समाधान हेतु प्रयास किए जाएंगे।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
यह आयोजन न केवल सचिवों के मनोबल को बढ़ाने वाला रहा, बल्कि ग्राम स्तर पर शासन और समाज के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल सिद्ध हुआ।
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