
सर्पदंश से कोरवा महिला की दर्दनाक मौत: इलाज के अभाव से रास्ते में तोड़ा दम,सरकार की योजनाएं बन रहीं कागज़ी, ज़मीनी हकीकत में नहीं मिल रहा लाभ।
जशपुर। जिले के सुदूर वनांचल मरंगीपाठ (बगीचा) से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां सर्पदंश की शिकार एक कोरवा महिला की मौत समय पर इलाज न मिलने के कारण हो गई। घटना की पीड़ा इस बात से और बढ़ जाती है कि कोरवा परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे मकान में फर्श पर सोने को मजबूर था, जहां महिला को सांप ने डंस लिया।
परिजनों ने तत्परता दिखाई और किराए के वाहन से महिला को अंबिकापुर अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में शंकरगढ़ के पास उसकी मौत हो गई। बताया गया कि क्षेत्र में न तो तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध थी और न ही एम्बुलेंस, जिससे समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया।
मृतका का परिवार अति पिछड़े कोरवा जनजाति से है और वह लंबे समय से अधूरे सरकारी आवास में रह रहा था। आवास निर्माण अधूरा है, छत नहीं है, परिवार मिट्टी की फर्श पर जीवन यापन कर रहा था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और शव को वापस गांव लाने की व्यवस्था की गई। हालांकि इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि यदि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलती, तो क्या महिला की जान बच सकती थी?
यह घटना शासन-प्रशासन की उन योजनाओं और दावों पर भी सवाल खड़े करती है, जिनमें आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान की बातें की जाती हैं। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी आज भी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस घटना से सबक लेकर वास्तव में ज़मीनी स्तर पर काम करेगा या फिर एक और आदिवासी मौत सिर्फ आंकड़ों में दर्ज होकर रह जाएगी?
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