
बड़ी खबर छत्तीसगढ़ : डेढ़ माह तक पूरे प्रदेश में मनाया जाएगा भव्य करमा महोत्सव 2025 जनजातीय परंपराओं की झलक बिखेरेंगे नर्तक दल, साय सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण को लेकर विशेष रूप से प्रयासरत।
जशपुर,08 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में इस वर्ष पूरे राज्य में करमा महोत्सव 2025 का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जो लगभग डेढ़ माह तक चार चरणों में आयोजित होगा।
चार चरणों में बिखरेगी सांस्कृतिक छटा
करमा महोत्सव का शुभारंभ ग्राम पंचायत स्तर पर 1 अक्टूबर से हो चुका है, जो 15 नवंबर तक चलेगा।
- ग्राम स्तर — 1 से 15 अक्टूबर
- विकासखंड स्तर — 16 से 31 अक्टूबर
- जिला स्तर — 1 से 7 नवंबर
- राज्य स्तर — 8 से 15 नवंबर
महोत्सव के दौरान करमा नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति और जनजातीय कलाकारों की झलक देखने को मिलेगी। कार्यक्रमों के आयोजन हेतु ग्राम पंचायतों को ₹2,000, विकासखंडों को ₹1 लाख, जिलों को ₹5 लाख तथा राज्य स्तर पर बजट उपलब्धता अनुसार राशि दी जाएगी।
नर्तक दलों के लिए आकर्षक पुरस्कार।
राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले करम नर्तक दल को ₹2 लाख, द्वितीय स्थान को ₹1 लाख, और तृतीय स्थान को ₹50 हजार की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
जिला स्तर पर प्रथम दल को ₹50 हजार, द्वितीय को ₹25 हजार, तृतीय को ₹15 हजार, और सांत्वना पुरस्कार के रूप में ₹10 हजार दिए जाएंगे।
🎶 पारंपरिक धुनों और वेशभूषा से सजेगा मंच
हर जिले से चयनित करम नर्तक दल पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ मंच पर प्रस्तुति देंगे। प्रत्येक दल को 15 मिनट का समय दिया जाएगा। महोत्सव के सभी चरणों में कलाकारों के लिए परिवहन, भोजन और आवास की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
🌳 करम वृक्ष: पूजनीय और मनोकामना पूर्ण करने वाला
करम महोत्सव जनजातीय समाज का प्रमुख पर्व है, जो करम वृक्ष की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसे मनोकामना पूर्ण करने वाला और पूजनीय वृक्ष माना गया है।
सरगुजा और रायगढ़ क्षेत्र में इसे क्रमशः करम राजा और करम सेनी के रूप में पूजा जाता है।
मुख्य उद्देश्य जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोकनृत्य और रीति-रिवाजों को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। यह उत्सव भादो से कार्तिक माह तक सरगुजा संभाग, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, महासमुंद और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुद
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