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हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भक्ति और संस्कृति का अनुपम संगम, 27 जुलाई तक चलेगा महोत्सव सीएम साय ने दोकड़ा में रथयात्रा महोत्सव में गजपति महाराजा की परंपरा निभाई भगवान श्री जगन्नाथ  का रथ खींचकर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की आस्था श्रद्धा और उल्लास के महासंगम में डूबी दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा

जशपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज विकाखंड कांसाबेल के ग्राम दोकड़ा में ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच भव्य रथयात्रा महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा पूरे वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकाली गई। पूरे दोकड़ा क्षेत्र में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंखध्वनि, घंटियों की मधुर ध्वनि, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं का उत्साह, भगवान के प्रति अटूट आस्था और रथ को खींचने की अद्भुत श्रद्धा ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने परंपरागत गजपति महाराजा की भूमिका का निर्वहन करते हुए धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं माता सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। पूजा-अर्चना के पश्चात मुख्यमंत्री ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भगवान के रथ की रस्सी खींचकर रथयात्रा का शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं ने भी पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ भगवान के रथ को आगे बढ़ाया। इस दौरान पद्मश्री श्री जागेश्वर यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, वरिष्ठ नागरिक श्री कृष्ण कुमार राय, श्री भरत सिंह, श्री उपेंद्र यादव, श्री सुनील गुप्ता, श्री ओमप्रकाश साय, श्री पुरुषोत्तम ठाकुर, श्री बलराम भगत, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित श्री जगन्नाथ मंदिर आयोजन समिति के सदस्य एवं भारी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी श्रद्धालुओं को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दोकड़ा की ऐतिहासिक रथयात्रा आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1942 में प्रारंभ हुई इस रथयात्रा का विशेष महत्व है। मंदिर का जीर्णोद्धार जनसहयोग से किया गया तथा वर्ष 2025 में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरी भव्य रथयात्रा आयोजित हो रही है। उन्होंने गजपति की उपाधि प्रदान करने के लिए दोकड़ावासियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान जगन्नाथ से प्राचीन संबंध है। देवभोग का चावल आज भी पुरी के महाप्रसाद में उपयोग होता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अब तक 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। महतारी वंदन योजना की 29 किस्तें जारी की गई हैं तथा रामलला दर्शन एवं मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि लंबित बिजली बिलों पर सरचार्ज माफी की अवधि तीन माह बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 चौबीसों घंटे संचालित है, जहां लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग एवं 520 से अधिक शासकीय सेवाएं गांव में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।उन्होंने कहा कि जशपुर जिले को शीघ्र ही रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। धरमजयगढ़-लोहरदगा रेल परियोजना को स्वीकृति मिल चुकी है। साथ ही मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति से जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।

 

गजपति महाराजा की परंपरा का हुआ भव्य निर्वहन –

ओड़िशा राज्य के पुरी की ऐतिहासिक परंपरा के अनुरूप दोकड़ा में भी गजपति महाराजा द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ की सेवा और रथयात्रा का शुभारंभ कराने की परंपरा निभाई जाती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान के चरणों में नतमस्तक होकर प्रदेश के सर्वांगीण विकास, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान छेरा पहरा रस्म भी अदा किया। इसके तहत गजपति महाराजा की भूमिका में उन्होंने सोने की बनी झाड़ू से भगवान के रथ के आगे का मार्ग साफ किया। सफाई करने के बाद रास्ते में पवित्र चंदन मिश्रित जल छिड़का गया। इसके बाद रथ को खींचने की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री के साथ हजारों श्रद्धालु रथयात्रा में शामिल हुए और भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया।

भक्ति, संस्कृति और लोक परंपरा का अद्भुत संगम –

रथयात्रा के दौरान ओडिशा की प्रसिद्ध कीर्तन मंडलियों ने संकीर्तन और भजन प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ढोल, मृदंग, झांझ और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालु नृत्य करते हुए भगवान के जयघोष लगाते रहे। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में भाग लिया। दोकड़ा का पूरा क्षेत्र रंग-बिरंगी सजावट, धार्मिक पताकाओं और श्रद्धालुओं की भीड़ से आस्था के विराट उत्सव में बदल गया।

मौसीबाड़ी तक पहुंचे भगवान, नौ दिनों तक देंगे भक्तों को दर्शन –

रथयात्रा के दौरान भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा अपने भव्य रथ पर विराजमान होकर मंदिर से मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान किए। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा, 25 जुलाई को सुना वेश, 26 जुलाई को अधर पाना तथा 27 जुलाई को नीलाद्री विजय के साथ भगवान पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।

17 से 21 जुलाई तक होगी श्री जगन्नाथ कथा –

मंदिर समिति ने बताया कि आज रथ यात्रा प्रारंभ के साथ ओडिशा के कीर्तन मंडली की प्रस्तुति तथा विभिन्न झांकियां एवं विशाल मेला का आयोजन किया गया। रथयात्रा महोत्सव के अंतर्गत 17 जुलाई से 21 जुलाई तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक प्रसिद्ध कीर्तनकार एवं कथा वाचक श्री कामता प्रसाद शरण जी द्वारा श्री जगन्नाथ महाप्रभु की संगीतमय कथा एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा, भक्ति और सनातन संस्कृति से जुड़ी प्रेरणादायक कथाओं का श्रवण करने का अवसर मिलेगा।

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होंगे विविध सांस्कृतिक आयोजन –

रथ यात्रा महोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अनेक सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। 22 जुलाई को लिटिल चैंप प्रतियोगिता, 23 जुलाई को रंगोली एवं चित्रकला प्रतियोगिता, 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा, 26 जुलाई की रात्रि में झारखंड एवं ओडिशा के प्रसिद्ध गायकों और कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रतिदिन फूल-माला प्रतियोगिता, भजन-कीर्तन, प्रातः एवं संध्या आरती एवं महाप्रसाद वितरण भी किया जाएगा।

1942 से निरंतर चली आ रही है गौरवशाली परंपरा –

दोकड़ा की रथयात्रा की शुरुआत वर्ष 1942 में स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय सुशीला सतपथी द्वारा की गई थी। तब से यह परंपरा निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जा रही है। आज यह आयोजन जशपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ के दर्शन एवं रथ की रस्सी खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

आस्था के साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश-

दोकड़ा की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है। इस आयोजन में सभी वर्गों और समुदायों के लोग एक साथ शामिल होकर भगवान श्री जगन्नाथ की भक्ति में लीन होते हैं। यही कारण है कि दोकड़ा की यह ऐतिहासिक रथयात्रा वर्ष दर वर्ष श्रद्धा, संस्कृति और लोक परंपराओं का विराट उत्सव बनकर नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रही है।

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Mukesh Nayak

Editer - Mukesh Nayak Jashpur (Cg) www.mukeshnk60@gmail.com

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