
जशपुर में सरेराह हमला : सड़क पर राह चलते जनपद सदस्य पर जानलेवा वारदात , मोबाइल लूटकर फरार हुए हमलावर, पूर्व केबिनेट मंत्री गणेश राम भगत सन्ना रवाना।
जशपुर :- जिले में शुक्रवार शाम एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे प्रशासन और आम जनता दोनों को झकझोर कर रख दिया है। बगीचा जनपद पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता पर सरेराह हमला हुआ है। जानकारी के अनुसार, राकेश गुप्ता शुक्रवार शाम बगीचा से अपने घर लौट रहे थे, तभी सन्ना थाना क्षेत्र के खैरापाठ में कार सवार युवकों ने रास्ते में उनकी गाड़ी रोक ली और उन पर हमला कर दिया। हमलावरों ने राकेश गुप्ता के साथ जमकर मारपीट की और उनका मोबाइल फोन छीन लिया। बताया जा रहा है कि घटना के बाद से उनका मोबाइल स्विच ऑफ है। यह घटना उस समय हुई जब जनपद सदस्य अकेले वाहन से घर लौट रहे थे। हमले के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। पीड़ित जनपद सदस्य ने सन्ना थाने में रवि भगत, प्रियांशु उर्फ रिशु केसरी, प्रतीक सिंह (प्रतीक होटल वाला) और ख्वाजा खान, सभी सन्ना निवासी, के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया गया है कि कार में एक अन्य युवक भी मौजूद था, जिसने मारपीट में हिस्सा नहीं लिया। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे राकेश गुप्ता द्वारा हाल ही में की गई शिकायत को कारण माना जा रहा है। राकेश गुप्ता ने शुक्रवार को ही बगीचा एसडीएम कार्यालय में सन्ना तहसीलदार रोशनी तिर्की के खिलाफ सरकारी जमीनों की खरीद-बिक्री और कथित दुर्व्यवहार के मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी शिकायत के बाद उनके विरोधियों ने बदला लेने के उद्देश्य से रास्ते में रोककर हमला किया।
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व कैबिनेट मंत्री और जनजाति सुरक्षा मंच के प्रमुख गणेशराम भगत तुरंत जशपुर से सन्ना के लिए रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि गणेशराम भगत स्वयं घटना स्थल पहुंचकर पुलिस और स्थानीय प्रशासन से बात करेंगे।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी और प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है और सभी के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। वहीं, राकेश गुप्ता की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।इस वारदात ने एक बार फिर जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर जब जनप्रतिनिधि तक सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा।
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