
सोगड़ा अघोर आश्रम सर्वेश्वरी समूह बना आस्था का केंद्र, दुर्लभ ब्रह्मकमल के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।
जशपुर। जिले के सोगड़ा स्थित अघोर आश्रम सर्वेश्वरी समूह ब्रह्मनिष्ठालय में बीती रात प्रकृति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब आश्रम परिसर में दुर्लभ ब्रह्मकमल का फूल खिला। यह वही पवित्र पुष्प है जो सामान्यतः हिमालय की ऊंची वादियों में खिलता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं का प्रिय माना जाता है।
ब्रम्हकमल के खिलते ही आश्रम परिसर में अलौकिक शांति और सुगंध का माहौल बन गया। इसकी खबर मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोगड़ा अघोर आश्रम सर्वेश्वरी समूह पहुंचने लगे।
अघोर परंपरा और सर्वेश्वरी समूह का इतिहास
सोगड़ा आश्रम, वामदेव नगर गम्हरिया और नारायणपुर चिटकवाइन स्थित सर्वेश्वरी समूह के आश्रमों का अपना गौरवशाली इतिहास है। जन सेवा भेद केंद्र चिटकवाइन अघोरेश्वर भगवान राम का प्रथम आश्रम रहा है, जहां जशपुर नरेश पूजा-अर्चना के लिए जाते थे।
बताया जाता है कि विद्यांचल में भैरव कुंड पर नवरात्रि साधना के दौरान जशपुर नरेश राजा विजय भूषण सिंह देव बाबा अवधूत भगवान राम से अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें जशपुर आने का आमंत्रण दिया। इसके पश्चात सोगड़ा में मां सर्वेश्वरी देवी की आराधना प्रारंभ हुई और बाबा ने सर्वेश्वरी समूह ट्रस्ट की स्थापना कर वन प्रांतों में निवासरत गरीबों की सेवा का कार्य आरंभ किया।
विश्वास और भक्ति का प्रतीक
सोगड़ा अघोर आश्रम सर्वेश्वरी समूह आज श्रद्धा, भक्ति और सेवा का केंद्र बन चुका है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ब्रह्मकमल का खिलना ईश्वरीय संकेत और शुभता का प्रतीक है। इस दिव्य पुष्प के दर्शन से मन को शांति और आत्मबल की अनुभूति होती है।
ब्रह्मकमल के दिव्य दर्शन के साथ सोगड़ा अघोर आश्रम सर्वेश्वरी समूह पूरे क्षेत्र में आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है।
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