
जशपुर। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के विरोध में जशपुर की सत्ताधारी दल की विधायक रायमुनी भगत के धरने ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेता यू डी मिंज ने कहा कि यह दृश्य अपने आप में सरकार के तथाकथित सुशासन की असलियत उजागर करने के लिए काफी है, जब सरकार की ही विधायक को प्रशासनिक कार्रवाई के लिए सैकड़ों ग्रामीणों के साथ सड़क पर बैठना पड़ रहा है।
यू डी मिंज ने सवाल उठाया कि पंचायत, तहसील और एसडीएम स्तर से रोक के आदेश जारी होने के बावजूद सन्ना क्षेत्र में अवैध निर्माण आखिर कैसे चलता रहा। उन्होंने पूछा कि यदि प्रशासनिक अमला समय रहते कार्रवाई करता तो धरने की नौबत क्यों आती और इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि सरकार के जनप्रतिनिधि खुद प्रशासनिक उदासीनता से परेशान हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ में सुशासन की पहचान योजनाओं से नहीं, बल्कि धरनों से होने लगी है।
यू डी मिंज ने आगे कहा कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूरे प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह गई है। जब जनप्रतिनिधियों को भी न्याय के लिए धरने पर बैठना पड़े, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
उन्होंने सन्ना प्रकरण में तत्काल अवैध निर्माण हटाने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
अंत में यू डी मिंज ने कहा कि कांग्रेस जनता के अधिकारों की लड़ाई में ग्रामीणों के साथ खड़ी है और ऐसे मामलों को लगातार उजागर करती रहेगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब विधायक ही न्याय के लिए सड़क पर उतरें, तो आम नागरिक आखिर किस दरवाजे पर जाए।
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