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रायपुर। धान खरीदी से वंचित रह गए किसानों के मामले में सरकार को आखिरकार दो दिन के लिए खरीदी दोबारा शुरू करने का फैसला लेना पड़ा। कांग्रेस विपक्ष के लगातार दबाव और किसानों की समस्याओं को लेकर उठते सवालों के बीच यह निर्णय लिया गया है। प्रदेश भर में तकनीकी खामियों, टोकन निरस्तीकरण और सिस्टम की लापरवाही के कारण हजारों किसान पहले चरण में अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आंदोलन और बयानबाजी तेज कर दी थी।
विपक्ष के दबाव में सरकार का फैसला
कांग्रेस नेताओं ने धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा था कि यदि तत्काल समाधान नहीं निकाला गया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद सरकार ने दो दिनों के लिए विशेष खरीदी की घोषणा की।
सिस्टम की खामियों से बढ़ी परेशानी
कई जिलों में सर्वर डाउन, टोकन जनरेट नहीं होना और खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था जैसी समस्याएं सामने आई थीं, जिसके चलते किसान समय-सीमा के भीतर धान नहीं बेच पाए।
अब भी सीमित दायरे में राहत
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगी जो पहले चरण में वंचित रह गए थे। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सूची के आधार पर ही खरीदी हो, ताकि नए विवाद न खड़े हों।
राजनीतिक दबाव और सिस्टम की लापरवाही के बीच लिए गए इस फैसले को किसानों के लिए राहत जरूर माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे सरकार की मजबूरी बता रहा है।
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