
Cg mirror News : स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, जशपुर जिले के सन्ना क्षेत्र में एम्बुलेंस खराब, एक्स-रे मशीन बंद, ज़ब क्षेत्र के BDC ने किया दौरा तब हॉस्पिटल की खुली पोल… लाचार सिस्टम पढ़िए पूरी कहानी
जशपुर: जिले के सन्ना क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद चिंताजनक वहीँ सिस्टम लाचार है । एक समय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्यरत सन्ना का अस्पताल अब केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनकर रह गया है, जिससे 60 से अधिक गांवों की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल में न तो एक्स-रे मशीन काम कर रही है और न ही एम्बुलेंस चालू हालत में है। आपातकाल की स्थिति में मरीजों को कई किलोमीटर दूर बगीचा, मनोरा या जशपुर ले जाना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता और कई बार जान का जोखिम भी बढ़ जाता है।
हालांकि हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले में 18 नए एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है, जिनमें से एक को सन्ना भेजा गया है। इसके अलावा, जिले में 14 नई एम्बुलेंस और एक शव वाहन की व्यवस्था भी की गई है, लेकिन इन सुधारों का लाभ सन्ना जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक अभी तक नहीं पहुंच पाया है।
घायलो को पिकअप में लेकर आते है अस्पताल
सन्ना क्षेत्र की स्थिति यह है कि यदि कोई सड़क दुर्घटना हो जाए तो घायलो को समय पर एम्बुलेंस भी नही मिल पाता है। एक सप्ताह पहले दो मोटर साइकिल के आमने सामने की टक्कर में एक कि मौत हो गई थी वही तीन लोग गंभीर रुप से घायल हो गए थे। जिन्हें समय पर एम्बुलेंस नही मिल पाया था।जनपद सदस्य राकेश गुप्ता एवं पुलिस के जवानों के द्वारा घायलों को पिकअप के माध्यम से अस्पताल पहुचाया गया था। समय पर एम्बुलेंस नही मिलने पर एक घायल की मौत हो गई थी।
एंबुलेंस सालों से कबाड़ में तब्दील
जिले के सन्ना क्षेत्र में बीआरजीएफ (पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि) के तहत मिली एंबुलेंस सालों से खराब पड़ी है। यह एंबुलेंस कभी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का एक अहम जरिया थी, लेकिन अब जर्जर अवस्था में खुले में फेंकी गई है। मरम्मत के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस एंबुलेंस के बंद होने से मरीजों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव से अस्पताल तक पहुंचने के लिए उन्हें निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो न सिर्फ महंगा है बल्कि समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न हो पाने के कारण कई बार जान पर भी बन आती है।
एक्सरे के लिए भटकना पड़ता है ग्रामीणों को
सन्ना अस्पताल में कहने को तो एक्सरे मशीन लगा हुआ है। लेकिन वह भी सिर्फ शो पीस बनकर रह गया है। सन्ना में एक्सरे नही होने के कारण लोगो को भटकना पड़ता है। यदि यहाँ किसी को एक्सरे करवाना हो तो उन्हें या तो बगीचा अस्पताल या जिला मुख्यालय या फिर अम्बिकापुर जाना पड़ता है। तब कही जाकर उनका एक्सरे हो पाता है।
समाधान की मांग की जाएगी
इस मामले में जनपद सदस्य राकेश गुप्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ग्रामीणों के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन कुछ विभागीय अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही बरत कर सरकार की छवि को ग्रामीणों के बीच धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।”उन्होंने आगे कहा कि इस विषय में संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जल्द समाधान की मांग की जाएगी, ताकि ग्रामीणों को फिर से एंबुलेंस सेवा का लाभ मिल सके।
क्या कहते है सीएमएचओ
सन्ना अस्पताल के संबंध में सीएमएचओ डॉ. जी एस जात्रा का कहना है कि सन्ना में 108 और 102 कि सेवा संचालित है। यदि वहां का एम्बुलेंस खराब स्थिति में है तो उसका सुधार करवाया जाएगा। एक्सरे मशीन के संबंध में जानकारी लेकर उसे भी सुधार कर लिया जएगा। ताकि वहाँ किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
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