
तपकरा में जंगल से सटे गांवों में हाथी-मानव संघर्ष पर जागरूकता अभियान , वन विभाग ने संवाद और सतर्कता से जीता ग्रामीणों का भरोसा..
जशपुर । जिले के तपकरा क्षेत्र के वनवासी अंचलों में जब रात की नीरवता हर ओर छा जाती है, तब भी कुछ लोग अपने कर्तव्यकी मशाल थामे गांव-गांव, टोला-टोला घूमते हैं—सिर्फ़ इसलिए कि किसी की नींद अनंत न हो जाए। ऐसे ही दो समर्पित वन अधिकारी हैं रेंजर आकांशा लकड़ा और वनरक्षक अविनाश शर्मा, जिन्होंने बीती रात एक बार फिर पूरे स्टाफ के साथ मिलकर हाथी-मानव द्वंद से जुड़ी जन-जागरूकता का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
रात के अंधेरे में जब लोग अपने घरों में सिमटे होते हैं, तब ये अधिकारी टॉर्च और माइक के साथ जंगल के किनारे बसे गांवों में दस्तक देते हैं। माइक से गूंजती आवाज़ होती है –
“भाइयों और बहनों, हाथियों से डरे नहीं, सतर्क रहें। बिजली के तार और पटाखों से उन्हें भगाने की जगह, समझदारी से बचाव करें।”
इस अभियान में केवल चेतावनी नहीं, बल्कि संवाद और समाधान भी हैं। ग्रामीणों से बात कर उनकी समस्याएं सुनना, हाथी मूवमेंट की जानकारी साझा करना, और सुरक्षित रहने के उपाय समझाना – यही इस अभियान की नींव है।
रेंजर आकांशा लकड़ा का नेतृत्व और अविनाश शर्मा एव अमित महराज, नरेश कुजूर, अरविन्द साय, नंदू यादव, दुर्गेश पैकरा सहित वनविभाग की टीम का स्थानीय अनुभव इस टीम को और प्रभावशाली बनाता है। अविनाश वर्षों से इस क्षेत्र में हाथियों के व्यवहार को समझते हुए जागरूकता के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद सिर्फ हाथियों से लोगों को बचाना नहीं, बल्कि लोगों को समझाना भी है कि ये संघर्ष नहीं, सहअस्तित्व का समय है।”

हाथी से प्रभावित क्षेत्र में तेन्दुपत्ता संग्रहण में भी खरीदी बंद:
वन परिक्षेत्र आकांक्षा नें बताया की हाथी विचरण क्षेत्र में सूचना मिलते ही तेन्दुपत्ता संग्रहण बंद कर दिया गया है सामन्य होते ही चालू किया जायेगा।
ग्रामीणों का उत्साह और सहभागिता यह दिखाता है कि जागरूकता की यह मशाल अब फैल रही है। बच्चों, बुज़ुर्गों, युवाओं सभी ने इस अभियान का स्वागत किया।
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