
cgmirror.com : रामानुजगंज पीजी कॉलेज में अतिथि व्याख्याता का आरोप – “प्राचार्य कर रहीं भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न”
शिकायत उच्च शिक्षा विभाग, विधायक प्रतिनिधि और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची, प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
रामानुजगंज।
शासकीय लरंग साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामानुजगंज एक बार फिर विवादों में है। कॉलेज के कंप्यूटर विभाग में कार्यरत अतिथि व्याख्याता पंकज विश्वकर्मा ने प्राचार्य रोज लिली बड़ा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। व्याख्याता ने प्राचार्य पर भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, पक्षपात और अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उच्च शिक्षा विभाग, क्षेत्रीय विधायक प्रतिनिधि और मुख्यमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी है।
शिक्षण कार्य के बाद भी परीक्षा से बाहर:
शिकायत के अनुसार पंकज विश्वकर्मा ने पूरे शैक्षणिक सत्र में नियमित रूप से शिक्षण कार्य किया, लेकिन 21 अप्रैल को डीसीए और पीजीडीसीए की प्रायोगिक परीक्षा से उन्हें यह कहते हुए हटा दिया गया कि उनकी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने इस फैसले को पक्षपातपूर्ण और अपमानजनक बताया।
सीनियर स्टाफ से मार्गदर्शन मांगने पर मिली गुमराही
व्याख्याता ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने वरिष्ठों से मार्गदर्शन लेना चाहा तो उन्हें जानबूझकर गलत जानकारी देकर गुमराह किया गया, जिससे वे अपने कार्य में असहज महसूस करें।
“मैं महिला हूं, ज्यादा बोलोगे तो ठीक नहीं होगा” – प्राचार्य की चेतावनी
शिकायत में यह भी कहा गया कि एक दिन प्राचार्य रोज लिली बड़ा ने व्याख्याता को धमकी दी, “मैं महिला हूं, ज्यादा बोलोगे तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा।” इसे व्याख्याता ने मानसिक उत्पीड़न करार दिया।
निवासरत शिक्षिका को विशेष लाभ का आरोप
व्याख्याता ने विभाग की एक अन्य शिक्षिका पर भी आरोप लगाया है जो प्राचार्य के साथ निवास करती हैं। आरोप है कि वह बिना नियमित कक्षाएं लिए केवल ऑनलाइन लिंक साझा कर मानदेय प्राप्त कर रही हैं।
जांच पर भी उठे सवाल
पंकज विश्वकर्मा ने कहा कि उनकी शिकायत पर 14 मई को एक जांच टीम कॉलेज पहुंची थी, लेकिन उनका पक्ष लिए बिना सिर्फ प्राचार्य और उनके समर्थकों के बयान दर्ज किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को एकतरफा रूप से प्रभावित किया गया।
प्राचार्य ने दी सफाई
प्राचार्य रोज लिली बड़ा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “यह शिकायत तथ्यहीन है। कॉलेज में पहले भी जांच हो चुकी है और एक और जांच टीम आने वाली है। मुझे किसी भी जांच से कोई आपत्ति नहीं।”
अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर
शिकायत तीन स्तरों – विभागीय, विधायक प्रतिनिधि और मुख्यमंत्री कार्यालय – तक पहुंच चुकी है। अब यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट क्या निष्कर्ष निकालती है और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाती है।
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