
CG Mirror News
जशपुर :- मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले फरसाबहार जनपद पंचायत में इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां पंचायत सचिवों की पदस्थापना को लेकर ऐसा अजीबो-गरीब और असंतुलित सिस्टम देखने को मिल रहा है, जिसने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यशैली पर भी संदेह खड़ा कर दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत में पदस्थ कुछ सचिवों को वर्षों से जनपद कार्यालय में ही अटैच कर रखा गया है, जबकि उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर काम करना चाहिए। श्रीमती जीवन झरना तिर्की और श्रीमती उषावती यादव पिछले करीब तीन वर्षों से जनपद कार्यालय में ही अटैच हैं। इतनी लंबी अवधि तक फील्ड से दूर रहना नियमों और शासन के निर्देशों के विपरीत माना जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि यहां पदस्थापन को लेकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, कुछ सचिवों पर कार्य का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया है। सचिव को एक साथ तीन पंचायतों का प्रभार सौंपा गया है। इनमें उनका गृह ग्राम – सिकिरमा भी शामिल है, जो प्रशासनिक दृष्टि से हितों के टकराव की स्थिति उत्पन्न करता है। एक ही व्यक्ति को कई पंचायतों की जिम्मेदारी देना न केवल कार्यों की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि फरसाबहार जनपद पंचायत में कुल 54 सचिव पदस्थ होने के बावजूद तीन सचिव योगेश कुलदीप, देवेश यादव और बोधनाथ सिदार लंबे समय से बिना किसी पंचायत के खाली बैठे हुए हैं। उन्हें अब तक किसी भी ग्राम पंचायत का प्रभार नहीं सौंपा गया है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पदस्थापन में संतुलन और निष्पक्षता का अभाव है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि इस पूरे मामले में आपसी मिलीभगत और प्रभाव का खेल चल रहा है। कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए पदस्थापन को मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जबकि अन्य को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह प्रशासनिक नैतिकता और सुशासन की अवधारणा के खिलाफ गंभीर मामला होगा। इस अव्यवस्था का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। जहां सचिव नहीं हैं या कार्यभार संतुलित नहीं है, वहां योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों को समय पर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर सीएम विष्णुदेव साय के अपने ही विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की अनियमितताएं कैसे हो रही हैं ?
क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, या फिर यह सब उनकी जानकारी में ही हो रहा है?
यदि ऐसा है, तो यह और भी गंभीर विषय बन जाता है। जनप्रतिनिधियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि, यदि जल्द ही इस अव्यवस्था को दूर नहीं किया गया, तो वे उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक इसकी शिकायत करेंगे। अब जरूरत है कि प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और पदस्थापन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
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