

जशपुर के युवा लेखक की साहित्यिक उड़ान ‘जीवन रेखा’ से राष्ट्रीय पहचान,अब छत्तीसगढ़ी भाषा में नई किताब की तैयारी
जशपुर। साहित्य जगत में जशपुर का नाम रोशन करने वाले युवा लेखक निर्मल कुमार गुप्ता ने अपनी लेखनी से खास पहचान बनाई है। श्री गुप्ता, पिता श्री कन्हैया गुप्ता, निवासी केरसई, जिला जशपुर वर्तमान में अंबिकापुर में रह रहे हैं। बचपन से ही कविता और कहानियों के शौकीन रहे निर्मल गुप्ता को साहित्यिक परिचर्चाओं में सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग और रौनियर बाल दर्पण जैसी संस्थाओं से सम्मानित किया जा चुका है। निर्मल गुप्ता ने राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से बी.कॉम स्नातक की पढ़ाई में टॉपर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक प्रतिभा का भी परिचय दिया। उनकी लेखनी पर उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का गहरा प्रभाव रहा है। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपना पहला एकल संग्रह ‘जीवन रेखा’ प्रकाशित किया, जिसमें जीवन के प्रत्यक्ष और परोक्ष अनुभवों को कहानी और कविता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘जीवन रेखा’ पुस्तक को पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है और यह अब मीशो और अमेज़ॉन जैसे प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है।
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निर्मल गुप्ता अब छत्तीसगढ़ी भाषा में अपनी नई पुस्तक लिखने की तैयारी में जुटे हैं, जिसे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग रायपुर के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उनकी इस नई पहल से छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। साहित्य जगत मानता है कि निर्मल गुप्ता जैसे युवा लेखक आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और देश की साहित्यिक धारा में अहम योगदान देंगे।
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